Introduction to Space Scientists and Life in Space : एमपी टीईटी वर्ग 3 (MPTET Varg 3) 2026 परीक्षा के ‘पर्यावरण अध्ययन’ (EVS) और ‘शिक्षाशास्त्र’ (Pedagogy) पाठ्यक्रम में “अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का परिचय और उनके अंतरिक्ष में जीवन बिताने के अनुभव” (Introduction to Space Scientists and Life in Space) एक अत्यंत रोमांचक, प्रेरणादायक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भरपूर अध्याय है।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के अनुसार, प्राथमिक स्तर (कक्षा 5) की EVS पाठ्यपुस्तक में सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला की कहानियाँ (पाठ: ‘सुनीता अंतरिक्ष में’) जानबूझकर शामिल की गई हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल ग्रहों के नाम रटाना नहीं है, बल्कि ‘गुरुत्वाकर्षण’ (Gravity) जैसे अमूर्त सिद्धांतों को उनके वास्तविक अनुभवों से जोड़ना और विशेषकर लड़कियों के मन में लैंगिक रूढ़िवादिता (Gender Stereotypes) को तोड़कर वैज्ञानिक बनने का सपना जगाना है।
यह आलेख प्रमुख भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के परिचय, शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) में जीवन के रहस्यों और पेडागॉजिकल (शिक्षणशास्त्रीय) रणनीतियों का एक महा-संगम है।
📚 पर्यावरण अध्ययन और शिक्षाशास्त्र (EVS & Pedagogy) – MPTET Varg 3
अध्याय: भारतीय अंतरिक्ष यात्री एवं वैज्ञानिक, अंतरिक्ष में जीवन और बाल-केंद्रित शिक्षा
(Indian Space Scientists, Life in Space, and Child-Centric Pedagogy)
1. अंतरिक्ष क्या है और वहां गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव (What is Space and Zero Gravity?)
पृथ्वी के वायुमंडल के पार जो अनंत खाली जगह है, उसे अंतरिक्ष (Space) कहते हैं।
पृथ्वी हर चीज को अपनी ओर एक चुंबक की तरह खींचती है, जिसे गुरुत्वाकर्षण (Gravity) कहते हैं। इसी के कारण हम जमीन पर टिके रहते हैं और पानी नीचे गिरता है। लेकिन अंतरिक्ष में (और विशेषकर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे स्पेस स्टेशन में) ‘माइक्रोग्रैविटी’ (Microgravity) या शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) की स्थिति होती है। वहाँ कोई भी चीज नीचे नहीं गिरती, बल्कि हवा में तैरती रहती है।
2. भारत के गौरव: प्रमुख अंतरिक्ष यात्री और वैज्ञानिक (Pride of India)
बच्चों को प्रेरित करने के लिए इन महान व्यक्तित्वों का परिचय देना अत्यंत आवश्यक है:
A. विंग कमांडर राकेश शर्मा (Rakesh Sharma) – अंतरिक्ष में पहले भारतीय
- परिचय: राकेश शर्मा अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय (First Indian) और विश्व के 138वें अंतरिक्ष यात्री थे।
- अंतरिक्ष यात्रा: उन्होंने 3 अप्रैल 1984 को सोवियत संघ (रूस) के ‘सोयुज टी-11’ (Soyuz T-11) मिशन के तहत अंतरिक्ष में उड़ान भरी और 8 दिन अंतरिक्ष स्टेशन में बिताए।
- प्रसिद्ध संवाद: जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा कि “अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है?”, तो उनका ऐतिहासिक जवाब था— “सारे जहाँ से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा।”

B. कल्पना चावला (Kalpana Chawla) – सितारों में विलीन एक सपना
- परिचय: कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। उनका जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ था।
- अंतरिक्ष यात्रा: वे पहली बार 1997 में नासा (NASA) के स्पेस शटल ‘कोलंबिया’ से अंतरिक्ष में गईं।
- दुर्घटना: 2003 में अपने दूसरे मिशन (STS-107) के दौरान, 16 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद जब उनका स्पेस शटल पृथ्वी पर वापस लौट रहा था, तो वायुमंडल में प्रवेश करते ही वह जलकर नष्ट हो गया। 1 फरवरी 2003 को कल्पना चावला सहित सभी 7 अंतरिक्ष यात्रियों की दुखद मृत्यु हो गई। (यह EVS का एक बहुत संवेदनशील विषय है)।

C. सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) – अंतरिक्ष में रिकॉर्ड बनाने वाली महिला
- परिचय: भारतीय मूल की (गुजरात से जुड़ी) दूसरी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री।
- अंतरिक्ष के अनुभव: उन्होंने अंतरिक्ष में 322 दिन (विभिन्न मिशनों में) बिताने का रिकॉर्ड बनाया है। EVS की कक्षा 5 की पुस्तक में उनके अनुभवों को बहुत विस्तार से बताया गया है, जो बच्चों के लिए एक ‘जादू’ जैसा है।
- उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के बाहर ‘स्पेस वॉक’ (Space Walk) करने और अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने का रिकॉर्ड भी बनाया था।

D. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam) और डॉ. विक्रम साराभाई
- डॉ. विक्रम साराभाई: इन्हें ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक’ (Father of Indian Space Program) माना जाता है। इन्होंने ही ISRO (इसरो) की स्थापना की नींव रखी थी।
- डॉ. कलाम (मिसाइल मैन): भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक, जिन्होंने भारत के पहले सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV-III) को बनाने में मुख्य भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में ही ‘रोहिणी’ उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया था।
3. अंतरिक्ष में जीवन बिताने के अद्भुत अनुभव (Life in Zero Gravity)
कक्षा 5 की NCERT EVS पुस्तक के अनुसार, जब सुनीता विलियम्स पृथ्वी पर वापस आईं, तो उन्होंने बच्चों को अपने वे अनुभव बताए जो गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण ‘जादुई’ लगते थे:
- बैठना और चलना असंभव: स्पेस स्टेशन (ISS) में कोई भी एक जगह टिक कर नहीं बैठ सकता। अंतरिक्ष यात्री एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए हवा में ‘तैरते’ (Float) रहते हैं।
- बाल हमेशा खड़े रहना: गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण बाल कभी नीचे नहीं गिरते, वे हमेशा ऊपर की ओर खड़े रहते हैं। इसलिए अंतरिक्ष में कंघी (Comb) करने की कोई आवश्यकता नहीं होती।
- भोजन करना एक खेल: वहाँ पानी गिलास में नहीं रुकता। पानी बुलबुलों (Blobs) के रूप में हवा में उड़ता है। मुँह धोने या पानी पीने के लिए उन बुलबुलों को ‘पकड़ना’ पड़ता है। खाना खाने के लिए भोजन के पैकेट को डाइनिंग टेबल पर ‘वेल्क्रो’ (टेप) से चिपकाना पड़ता है, वरना खाना उड़ने लगेगा।
- सोना (Sleeping): सोने के लिए बिस्तर पर नहीं लेट सकते। अंतरिक्ष यात्री खुद को एक ‘स्लीपिंग बैग’ (Sleeping bag) में पैक करते हैं और उस बैग को दीवार से बांध (Strap) देते हैं ताकि वे नींद में उड़कर कहीं टकरा न जाएं।
4. 🏆 विस्तृत कक्षा-कक्ष परिदृश्य (Mega Pedagogical Case Studies)
छोटे बच्चों को ‘शून्य गुरुत्वाकर्षण’ और अंतरिक्ष विज्ञान समझाना अमूर्त (Abstract) लग सकता है। NCF 2005 के अनुसार एक शिक्षक इसे कैसे पढ़ाएगा?
📌 केस स्टडी 1: ‘उड़ते हुए बाल और पानी के बुलबुले’ (Developing Scientific Curiosity)
परिदृश्य (Scenario): कक्षा 5 में ‘सुनीता अंतरिक्ष में’ पाठ शुरू हो रहा है। बच्चों को गुरुत्वाकर्षण की अवधारणा समझानी है।
EVS पेडागॉजिकल (आधुनिक) प्रतिक्रिया:
- शिक्षक शुरुआत में सीधे परिभाषा नहीं रटाता। वह कक्षा में एक गेंद को ऊपर उछालता है और वह नीचे गिर जाती है। वह पूछता है— “यह नीचे क्यों आई?” (बच्चे कहते हैं, पृथ्वी खींचती है)।
- फिर शिक्षक बच्चों को ‘सुनीता विलियम्स का एक वीडियो’ दिखाता है, जिसमें उनके बाल ऊपर खड़े हैं और वे पानी के बुलबुले हवा में मुँह से पकड़ कर पी रही हैं।
- बच्चों की आँखें आश्चर्य से फटी रह जाती हैं। शिक्षक समझाता है— “अंतरिक्ष में पृथ्वी की वह खींचने वाली ताकत (Gravity) खत्म हो जाती है। इसलिए वहाँ सब कुछ उड़ता है।”
- निष्कर्ष: दृश्य अनुभव (Visual Experience) से बच्चों के मस्तिष्क में ‘संज्ञानात्मक द्वंद्व’ (Cognitive Dissonance) पैदा होता है, जिससे उनकी वैज्ञानिक जिज्ञासा (Curiosity) अपने चरम पर पहुँच जाती है।
📌 केस स्टडी 2: जेंडर स्टीरियोटाइप तोड़ना (Breaking Gender Stereotypes)
परिदृश्य (Scenario): कक्षा में चर्चा के दौरान एक लड़का कहता है, “मैडम, अंतरिक्ष में रॉकेट चलाना तो लड़कों का काम है, लड़कियां तो डर जाएंगी।”
EVS पेडागॉजिकल प्रतिक्रिया:
- शिक्षक लड़के को डांटने के बजाय ‘कल्पना चावला’ और ‘सुनीता विलियम्स’ की प्रेरक कहानियों का उपयोग करता है।
- शिक्षक बताता है कि कैसे हरियाणा के एक छोटे से शहर की लड़की (कल्पना) ने आसमान की ऊंचाइयों को छुआ और कैसे सुनीता ने अंतरिक्ष में महीनों अकेले बिताए।
- शिक्षक बच्चों को ISRO की महिला वैज्ञानिकों (जिन्हें रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया कहा जाता है) की तस्वीरें दिखाता है जिन्होंने ‘चंद्रयान’ और ‘मंगलयान’ को सफल बनाया।
- निष्कर्ष: यह पेडागॉजिकल रणनीति बच्चों (विशेषकर लड़कियों) को यह संदेश देती है कि “सपने जेंडर नहीं देखते।” इससे कक्षा में लैंगिक समानता (Gender Equality) स्थापित होती है।
📌 केस स्टडी 3: पृथ्वी के आकार की समझ (Global Perspective)
परिदृश्य (Scenario): बच्चों को नक्शे (Globe) पर देशों की सीमाएं (Borders) दिखाई देती हैं। वे मानते हैं कि पृथ्वी पर वास्तव में ऐसी लाइनें खींची हुई हैं।
EVS पेडागॉजिकल प्रतिक्रिया:
- शिक्षक सुनीता विलियम्स का वह अनुभव बच्चों को पढ़कर सुनाता है जिसमें उन्होंने कहा था— “अंतरिक्ष से पृथ्वी पर कोई देश या सीमा (Line) नहीं दिखती। वहाँ से सिर्फ नीला समुद्र और हरी-भरी जमीन दिखती है। ये सीमाएं तो इंसानों ने कागजों पर खींची हैं।”
- निष्कर्ष: इससे बच्चों में ‘वैश्विक नागरिकता’ (Global Citizenship) और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का मूल्य विकसित होता है। वे समझते हैं कि पर्यावरण और पृथ्वी हम सबकी साझी विरासत है।
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) और अंतरिक्ष विज्ञान के दृष्टिकोण से परीक्षा में सीधे पूछे जाने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य:
- प्रश्न: अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय कौन थे?
- उत्तर: विंग कमांडर राकेश शर्मा (1984)।
- प्रश्न: अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की प्रथम महिला कौन थीं?
- उत्तर: कल्पना चावला (Kalpana Chawla)।
- प्रश्न: अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में अंतरिक्ष यात्रियों के बाल हमेशा ऊपर क्यों खड़े रहते हैं?
- उत्तर: शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity / Microgravity) के कारण।
- प्रश्न: भारत की अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) का पूर्ण रूप क्या है और इसका मुख्यालय कहाँ है?
- उत्तर: Indian Space Research Organisation (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन), मुख्यालय – बेंगलुरु।
- प्रश्न: भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक (Father of Indian Space Program) किसे माना जाता है?
- उत्तर: डॉ. विक्रम साराभाई (Dr. Vikram Sarabhai) को।
- प्रश्न: अंतरिक्ष में पानी किस रूप में रहता है?
- उत्तर: पानी हवा में तैरते हुए ‘बुलबुलों’ (Blobs) के रूप में रहता है।
- प्रश्न: वह कौन सी भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिलाओं में रिकॉर्ड बनाया?
- उत्तर: सुनीता विलियम्स (Sunita Williams)।
- प्रश्न: अंतरिक्ष यात्रियों को सोने के लिए खुद को बेल्ट से क्यों बांधना पड़ता है?
- उत्तर: ताकि शून्य गुरुत्वाकर्षण के कारण वे नींद में हवा में तैरते हुए उपकरणों से न टकरा जाएं।
- प्रश्न: 1 फरवरी 2003 को किस स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने से कल्पना चावला की मृत्यु हो गई थी?
- उत्तर: स्पेस शटल कोलंबिया (Space Shuttle Columbia)।
- प्रश्न: भारत के पहले कृत्रिम उपग्रह (Satellite) का नाम क्या था?
- उत्तर: आर्यभट्ट (Aryabhata – 1975 में लॉन्च)।
- प्रश्न: अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीली क्यों दिखाई देती है?
- उत्तर: पृथ्वी के 71% हिस्से पर पानी (समुद्र) होने के कारण प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering) से।
- प्रश्न: चंद्रमा पर कदम रखने वाले विश्व के पहले व्यक्ति कौन थे?
- उत्तर: नील आर्मस्ट्रांग (Neil Armstrong – 1969 में, अपोलो 11 मिशन)।
- प्रश्न: भारत के किस वैज्ञानिक को ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है?
- उत्तर: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम।
- प्रश्न: पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल (Gravity) क्या कार्य करता है?
- उत्तर: यह सभी वस्तुओं को पृथ्वी के केंद्र की ओर खींचता है, जिससे हम जमीन पर टिके रहते हैं।
- प्रश्न: NCF 2005 के अनुसार EVS में सुनीता विलियम्स का पाठ शामिल करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- उत्तर: बच्चों में गुरुत्वाकर्षण जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं की समझ विकसित करना और जेंडर स्टीरियोटाइप (लैंगिक रूढ़िवादिता) को तोड़ना।
❓ बहुविकल्पीय प्रश्न (Deep-Concept MCQs for MPTET)
प्रश्न 1: कक्षा 5 की EVS पाठ्यपुस्तक में ‘सुनीता अंतरिक्ष में’ नामक पाठ है। शिक्षिका बच्चों को बताती है कि अंतरिक्ष यान (Space Station) में सुनीता और अन्य यात्री एक जगह बैठ नहीं पाते थे, बल्कि वे तैरते (Float) रहते थे। इसका सबसे प्रमुख वैज्ञानिक कारण क्या है?
(A) अंतरिक्ष यान में हवा (ऑक्सीजन) का दबाव बहुत कम होता है।
(B) अंतरिक्ष यान बहुत तेजी से घूम रहा था, जिससे वे उड़ने लगे।
(C) अंतरिक्ष में पृथ्वी का ‘गुरुत्वाकर्षण बल’ (Gravity) कार्य नहीं करता (शून्य गुरुत्वाकर्षण), जिसके कारण वस्तुओं में भार (Weight) नहीं रहता।
(D) अंतरिक्ष यात्रियों के जूतों में विशेष स्प्रिंग लगे होते हैं।
उत्तर: (C)
व्याख्या: गुरुत्वाकर्षण वह बल है जो वस्तुओं को पृथ्वी से बांधे रखता है। अंतरिक्ष स्टेशन में माइक्रोग्रैविटी (Microgravity) की स्थिति होती है। इसी कारण वहाँ कंघी करने की जरूरत नहीं होती, पानी बुलबुले बन जाता है और इंसान हवा में तैरते रहते हैं।
प्रश्न 2: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना तब घटी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री ने एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री से पूछा, “ऊपर से भारत कैसा दिखता है?” और जवाब मिला, “सारे जहाँ से अच्छा।” यह ऐतिहासिक कथन किस अंतरिक्ष यात्री का था?
(A) डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
(B) कल्पना चावला
(C) विंग कमांडर राकेश शर्मा
(D) सतीश धवन
उत्तर: (C)
व्याख्या: 1984 में सोवियत संघ के सोयुज टी-11 मिशन के जरिए अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय ‘राकेश शर्मा’ थे। उनका यह जवाब भारत के अंतरिक्ष इतिहास का सबसे गौरवशाली क्षण माना जाता है।
प्रश्न 3: पर्यावरण अध्ययन की कक्षा में एक शिक्षिका जानबूझकर ‘कल्पना चावला’ और ‘सुनीता विलियम्स’ की अंतरिक्ष यात्राओं और उनके साहस की कहानियों पर बहुत अधिक जोर देती है। NCF 2005 के शिक्षणशास्त्रीय (Pedagogical) दृष्टिकोण से शिक्षिका का मुख्य लक्ष्य क्या है?
(A) बच्चों को केवल नासा (NASA) के बारे में जानकारी देना।
(B) यह दिखाना कि केवल भारतीय लोग ही अंतरिक्ष में जाते हैं।
(C) कक्षा में व्याप्त ‘लैंगिक रूढ़िवादिता’ (Gender Stereotype) को चुनौती देना और यह संदेश देना कि विज्ञान, साहस और खोज के क्षेत्र में लड़कियां भी लड़कों के समान ही असीम ऊंचाइयों को छू सकती हैं।
(D) बच्चों को स्कूल से निकालकर सीधे अंतरिक्ष में भेजना।
उत्तर: (C)
व्याख्या: EVS पाठ्यक्रम का सबसे बड़ा उद्देश्य ‘समानता’ और ‘रूढ़ियों को तोड़ना’ है। अक्सर समाज में माना जाता है कि विज्ञान और पायलट बनना पुरुषों का काम है। कल्पना और सुनीता की कहानियां बालिकाओं को रोल मॉडल (Role Model) प्रदान करती हैं और लड़कों की सोच में सकारात्मक बदलाव लाती हैं।
प्रश्न 4: सुनीता विलियम्स ने बच्चों को बताया कि अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी पर देशों के बीच कोई रेखाएं (Borders) नहीं दिखाई देतीं; केवल समुद्र और जमीन दिखती है। एक EVS शिक्षक इस अनुभव का उपयोग बच्चों में कौन सा ‘मूल्य’ (Value) विकसित करने के लिए करेगा?
(A) भूगोल का मानचित्र रटवाने के लिए।
(B) बच्चों को यह बताने के लिए कि राजनेताओं ने नक्शे गलत बनाए हैं।
(C) ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) और वैश्विक नागरिकता (Global Citizenship) की भावना का विकास करने के लिए, कि प्रकृति ने हमें बांटा नहीं है, हम सब एक ही पृथ्वी के निवासी हैं।
(D) देशों के बीच युद्ध करवाने के लिए।
उत्तर: (C)
व्याख्या: यह एक बहुत ही उच्च-स्तरीय मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पाठ है। यह बच्चों को संकीर्ण राष्ट्रवाद से ऊपर उठकर ‘संपूर्ण मानवता और पृथ्वी के पर्यावरण’ के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाता है।
अंतिम संदेश (Final Note for Aspirants):
प्रिय भावी शिक्षकों, अंतरिक्ष विज्ञान केवल सितारों की खोज नहीं है; यह इंसानी साहस और सीमाओं को लांघने की कहानी है। जब आप अपनी कक्षा में कल्पना चावला या राकेश शर्मा का जिक्र करते हैं, तो हो सकता है कि पीछे की बेंच पर बैठा कोई बच्चा कल का अब्दुल कलाम बनने का सपना बुन रहा हो। MPTET परीक्षा में पेडागोजी के प्रश्नों को हल करते समय हमेशा उन विकल्पों का चयन करें जो बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा (Scientific Curiosity), लैंगिक समानता (Gender Equality), और अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) को बढ़ावा देते हों। आपकी आगामी परीक्षा के लिए अनंत शुभकामनाएँ!
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