स्मृति और विस्मृति Memory and Forgetting

एमपी टीईटी वर्ग 3 (MPTET Varg 3) 2026 परीक्षा के ‘बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र’ (CDP) और ‘पेडागोजी’ पाठ्यक्रम में “स्मृति और विस्मृति” (Memory and Forgetting) एक अत्यंत महत्वपूर्ण, तकनीकी और उच्च अंकदायी अध्याय है।

एक प्राथमिक शिक्षक (Primary Teacher) के रूप में आपको यह अनुभव होता होगा कि आप कक्षा में जो पढ़ाते हैं, कुछ बच्चे उसे लंबे समय तक याद रखते हैं, जबकि कुछ बच्चे उसे बहुत जल्दी भूल जाते हैं। आखिर हमारे मस्तिष्क में सूचनाएं कैसे दर्ज होती हैं, वे कहाँ स्टोर होती हैं, और हम उन्हें क्यों भूल जाते हैं? इन सभी मनोवैज्ञानिक रहस्यों को समझना हर शिक्षक के लिए अनिवार्य है।

यह विस्तृत, गहन और परीक्षा-केंद्रित आलेख नए अभ्यर्थियों और सेवारत शिक्षकों दोनों के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका के रूप में प्रस्तुत है।

📚 बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) – MPTET Varg 3

अध्याय: स्मृति और विस्मृति: अर्थ, प्रकार, मॉडल और भूलने के कारण

(Memory and Forgetting: Meaning, Types, Models, and Causes of Forgetting)

1. प्रस्तावना: स्मृति और विस्मृति का मनोविज्ञान (Introduction)

मानव मस्तिष्क प्रकृति का सबसे अद्भुत कंप्यूटर है। हम अपने दैनिक जीवन में लाखों चीजें देखते, सुनते और अनुभव करते हैं। इनमें से कुछ बातें हमारे मस्तिष्क में हमेशा के लिए दर्ज हो जाती हैं, और कुछ हम कुछ ही पलों में भूल जाते हैं।

  • स्मृति (Memory): पूर्व में सीखे गए ज्ञान, अनुभवों या सूचनाओं को मस्तिष्क में संचित (Store) करके रखने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पुनः चेतना में लाने (Retrieval) की मानसिक प्रक्रिया को ‘स्मृति’ कहते हैं।
  • विस्मृति (Forgetting): सीखी हुई बात या सूचना को समय पर याद न कर पाना या उसे पुनः स्मरण करने में असमर्थ होना ‘विस्मृति’ कहलाता है। विस्मृति को केवल एक नकारात्मक कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए; यदि हम हर फालतू बात को याद रखें, तो मस्तिष्क पर अत्यधिक बोझ (Overload) आ जाएगा। इसलिए चीजों को भूलना भी मस्तिष्क की एक प्राकृतिक और स्वस्थ प्रक्रिया है।

2. स्मृति की प्रक्रिया और इसके चरण (Stages of Memory Process)

मनोविज्ञान में स्मृति मुख्य रूप से तीन चरणों या प्रक्रियाओं से होकर गुजरती है:

  1. संकेतन या कूटलेखन (Encoding):यह पहला चरण है। जब कोई बाहरी सूचना हमारी ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से मस्तिष्क में प्रवेश करती है, तो मस्तिष्क उसे एक अर्थपूर्ण रूप (Code) में बदलकर दर्ज करता है। (जैसे—फोन नंबर सुनते ही उसे मस्तिष्क में रिकॉर्ड करना)।
  2. संचयन या भंडारण (Storage / Retention):संकेतित की गई सूचना को मस्तिष्क के विभिन्न भंडारों में सुरक्षित रखना संचयन कहलाता है।
  3. पुनर्स्मरण या पुनःप्राप्ति (Retrieval):जब कभी आवश्यकता पड़ने पर उस संचित सूचना को वापस चेतना में लाया जाता है, तो उसे पुनर्स्मरण कहते हैं। (जैसे—परीक्षा में प्रश्न देखकर उत्तर याद आ जाना)।

3. स्मृति के प्रकार या मॉडल (Types/Models of Memory)

अटकिसन और शिफरिन (Atkinson and Shiffrin) का सूचना प्रक्रमण मॉडल (Information Processing Model) स्मृति को तीन मुख्य भागों में बांटता है:

A. संवेदी स्मृति (Sensory Memory):

  • यह स्मृति का सबसे पहला और क्षणिक स्तर है।
  • इसमें ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से सूचनाएं मात्र कुछ मिलीसेकंड से लेकर 1 से 3 सेकंड तक ही ठहरती हैं। (जैसे—बिजली चमकने के बाद उसकी चमक की छाप आँखों पर कुछ पल रहना)। यदि इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह तुरंत गायब हो जाती है।

B. अल्पकालिक स्मृति (Short-Term Memory – STM):

  • इसे ‘कार्यकारी स्मृति’ (Working Memory) भी कहते हैं।
  • इसमें सूचनाएं लगभग 15 से 30 सेकंड तक रहती हैं।
  • इसकी क्षमता बहुत सीमित होती है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक जॉर्ज मिलर (George Miller) के अनुसार, अल्पकालिक स्मृति में एक समय में केवल $7 \pm 2$ (अर्थात 5 से 9) यूनिट या अंक ही याद रखे जा सकते हैं (जैसे 10 अंकों का मोबाइल नंबर याद रखने में हमें टुकड़े करने पड़ते हैं)।

C. दीर्घकालिक स्मृति (Long-Term Memory – LTM):

  • यह स्मृति का विशाल भंडार है जिसमें सूचनाएं जीवनभर या लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं।
  • इसकी क्षमता असीम (Unlimited) होती है। LTM के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की स्मृतियाँ आती हैं:
    • एपिसॉडिक मेमोरी (Episodic Memory): व्यक्तिगत जीवन की घटनाओं की यादें (जैसे- आपका पहला स्कूल का दिन)।
    • सिमेंटिक मेमोरी (Semantic Memory): तथ्यों, नियमों और ज्ञान की यादें (जैसे- भारत की राजधानी दिल्ली है)।
    • प्रोसीजरल मेमोरी (Procedural Memory): कौशल और आदतों की यादें (जैसे- साइकिल चलाना या तैरना, जो एक बार सीखने पर कभी नहीं भूलती)।

4. विस्मृति (Forgetting): अर्थ और इसके प्रमुख कारण

विस्मृति का अर्थ है—”याद की हुई बात का समय पर स्मरण न होना।” हरमन एबिंगhaus (Hermann Ebbinghaus) पहले मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने वैज्ञानिक रूप से ‘विस्मृति का वक्र’ (Forgetting Curve) प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सीखने के तुरंत बाद हम सबसे ज्यादा भूलते हैं (शुरुआती घंटों में भूलने की गति बहुत तेज होती है, और फिर वह स्थिर हो जाती है)।

विस्मृति के प्रमुख कारण:

  1. न उपयोग का नियम (Law of Disuse / Decay Theory):थार्नडाइक के नियमों के अनुसार, जिस ज्ञान या कौशल का हम लंबे समय तक अभ्यास (Practice) नहीं करते, समय बीतने के साथ उसके तंत्रिका पथ (Neural traces) कमजोर पड़ जाते हैं और हम उसे भूल जाते हैं।
  2. दमन या प्रेरणाकृत विस्मृति (Repression / Motivated Forgetting):सिगमंड फ्रायड के अनुसार, कई बार हम उन घटनाओं या अनुभवों को जानबूझकर या अचेतन रूप से भूलना चाहते हैं जो अत्यधिक दर्दनाक, अपमानजनक या तनावपूर्ण होते हैं।
  3. हस्तक्षेप का सिद्धांत (Interference Theory):जब दो अलग-अलग सूचनाएं आपस में मिल जाती हैं और एक-दूसरे को याद रखने में बाधा डालती हैं, तो उसे हस्तक्षेप कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है:
    • पूर्वसक्रिय हस्तक्षेप (Proactive Interference): पुराना ज्ञान नए ज्ञान को याद रखने में बाधा डाले।
    • अनुसक्रिय हस्तक्षेप (Retroactive Interference): नया ज्ञान पुराने ज्ञान को धुंधला कर दे।
  4. खराब संकेतन (Poor Encoding):यदि सीखते समय हमारा ध्यान (Attention) नहीं था और सूचना ठीक से मस्तिष्क में दर्ज (Encode) ही नहीं हुई, तो हम उसे बाद में याद नहीं रख पाएंगे (यानी ‘भूलना’ नहीं, बल्कि ‘कभी ठीक से याद ही न करना’)।
  5. मानसिक आघात या शारीरिक क्षति (Brain Injury / Trauma):मस्तिष्क पर गहरी चोट लगने या बीमारी के कारण भी याददाश्त जा सकती है (जिसे एम्नेशिया – Amnesia कहते हैं)।

5. कक्षा-कक्ष में स्मृति को बढ़ाने और विस्मृति को घटाने की रणनीतियाँ

एक MPTET वर्ग 3 शिक्षक के रूप में, आप बच्चों को चीजें लंबे समय तक याद रखने में कैसे मदद कर सकते हैं?

  1. अर्थपूर्ण अधिगम (Meaningful Learning):रटने (Rote memorization) पर जोर देने के बजाय बच्चों को अवधारणाओं का अर्थ समझाएं। अर्थपूर्ण चीजें मस्तिष्क में आसानी से दीर्घकालिक स्मृति (LTM) में चली जाती हैं।
  2. पुनरावृत्ति और अभ्यास (Repetition and Practice):अल् अंतराल पर पाठ को दोहराना (Distributed Practice) एक बार में घंटों रटने से ज्यादा प्रभावी होता है।
  3. स्मृति सहायक तकनीकें (Mnemonics):बच्चों को कठिन नियमों या सूचियों को याद रखने के लिए राइम्स, शॉर्टकट ट्रिक्स (Mnemonics) या दृश्य संकेतों (Visual aids) का उपयोग सिखाएं।
  4. बहु-संवेदी उपागम (Multi-Sensory Approach):चीजों को केवल सुनना या पढ़ना नहीं, बल्कि उन्हें देखना, छूना और प्रयोग करना (VAKT विधि) स्मृति को मजबूत करता है।
  5. तनाव-मुक्त वातावरण (Stress-Free Environment):अत्यधिक भय और परीक्षा का तनाव स्मृति को ब्लॉक कर देता है। कक्षा में आनंददायी और सुरक्षित माहौल रखें ताकि बच्चे सूचनाओं को आसानी से याद रख सकें।

6. कक्षा-कक्ष परिदृश्य (Case Study: Overcoming Student Forgetting)

परिदृश्य (Scenario):

आप प्राथमिक विद्यालय (वर्ग 3) में गणित पढ़ा रहे हैं। आप बच्चों को पहाड़े (Tables) याद करवाते हैं। अगले दिन जब आप पूछते हैं, तो ‘रोहित’ कहता है— “मैडम, कल तो मुझे याद था, पर आज सुबह मैं सब भूल गया!”

एक पारंपरिक/असंensical शिक्षक की प्रतिक्रिया:

शिक्षक रोहित को डांटता है— “तुम बहुत लापरवाह हो, घर पर बिल्कुल रिवीजन नहीं करते! कल मुर्गा बनोगे।” (इससे रोहित के मन में गणित के प्रति डर और विस्मृति का तनाव और बढ़ जाता है)।

एक मनोवैज्ञानिक और आधुनिक शिक्षक (आपकी) प्रतिक्रिया:

बाल मनोविज्ञान और स्मृति के सिद्धांतों के ज्ञाता होने के नाते आप समझ जाएंगे कि रोहित की यह समस्या उसकी ‘लापरवाही’ नहीं, बल्कि अल्पकालिक स्मृति (STM) से दीर्घकालिक स्मृति (LTM) में सूचना के ठीक से स्थानांतरित न होने के कारण है।

  1. आप रोहित को डांटने के बजाय समझाते हैं— “कोई बात नहीं रोहित, बिना अभ्यास के मस्तिष्क पुरानी बातों को धुंधला कर देता है (Decay Theory)। चलो, हम इसे एक मजेदार खेल और तालियों के साथ दोबारा दोहराते हैं।”
  2. आप उसे रटाने के बजाय तालियों, गानों और वास्तविक वस्तुओं की मदद से पैटर्न समझाते हैं (अर्थपूर्ण अधिगम और बहु-संवेदी शिक्षण)।
  3. आप उसे छोटे-छोटे अंतराल पर अभ्यास (Distributed Practice) करने की सलाह देते हैं।

इस वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण से रोहित पहाड़े भी याद रख लेता है और उसका गणित का डर हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।

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  • प्रश्न: स्मृति की प्रक्रिया का सही क्रम क्या है?
    • उत्तर: संकेतन (Encoding) $\rightarrow$ संचयन (Storage) $\rightarrow$ पुनर्स्मरण (Retrieval)।
  • प्रश्न: अल्पकालिक स्मृति (STM) की क्षमता कितनी होती है?
    • उत्तर: बहुत सीमित ($7 \pm 2$ अंक या 15 से 30 सेकंड)।
  • प्रश्न: ‘विस्मृति का वक्र’ (Forgetting Curve) सबसे पहले किसने प्रस्तुत किया था?
    • उत्तर: हरमन एबिंगhaus (Hermann Ebbinghaus)।
  • प्रश्न: जब कोई दर्दनाक या अपमानजनक घटना हम अचेतन रूप से भूल जाते हैं, तो उसे क्या कहते हैं?
    • उत्तर: दमन या प्रेरणाकृत विस्मृति (Repression)।
  • प्रश्न: साइकिल चलाना या तैरना किस प्रकार की स्मृति का उदाहरण है?
    • उत्तर: प्रक्रियात्मक स्मृति (Procedural Memory / LTM का हिस्सा)।

❓ FAQ: परीक्षा उपयोगी बहुविकल्पीय प्रश्न (Example MCQs for MPTET)

प्रश्न 1: अल्पकालिक स्मृति (Short-Term Memory) के संदर्भ में जॉर्ज मिलर का $7 \pm 2$ का नियम क्या दर्शाता है?

(A) मस्तिष्क का वजन

(B) अल्पकालिक स्मृति में एक समय में याद रखी जाने वाली सूचनाओं की सीमित क्षमता (Items capacity)

(C) बच्चे की उम्र

(D) पढ़ने की गति

उत्तर: (B)

व्याख्या: जॉर्ज मिलर ने बताया कि अल्पकालिक स्मृति की क्षमता सीमित होती है और मनुष्य एक बार में 5 से 9 सूचनाओं के टुकड़ों को ही दिमाग में रख सकता है।

प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन सा कारक ‘विस्मृति’ (Forgetting) के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी नहीं है?

(A) समय का गुजरना और अभ्यास न करना (Decay)

(B) सूचना का सही तरीके से संकेतन (Encoding) होना

(C) दो सूचनाओं के बीच आपसी हस्तक्षेप (Interference)

(D) अत्यधिक मानसिक तनाव

उत्तर: (B)

व्याख्या: यदि सूचना का संकेतन (Encoding) सही तरीके से हुआ है, तो वह स्मृति को मजबूत करता है, न कि विस्मृति पैदा करता है। अन्य सभी विकल्प विस्मृति के कारण हैं।

प्रश्न 3: एक शिक्षक के रूप में, बच्चों में ‘दीर्घकालिक स्मृति’ (Long-Term Memory) को मजबूत करने के लिए आपको क्या करना चाहिए?

(A) बच्चों से कहें कि वे हर बात को बिना समझे रट लें।

(B) नई जानकारी को बच्चों के पूर्व-ज्ञान और वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़कर अर्थपूर्ण बनाएं।

(C) बच्चों को हमेशा डरा कर रखें।

(D) केवल एक बार पाठ पढ़ाकर छोड़ दें।

उत्तर: (B)

व्याख्या: अर्थपूर्ण अधिगम और पूर्व-ज्ञान से जुड़ाव सूचनाओं को अल्पकालिक स्मृति से निकालकर दीर्घकालिक स्मृति (LTM) में सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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