अधिगम का आकलन शाला आधारित आकलन और CCE Assessment and Evaluation

एमपी टीईटी वर्ग 3 (MPTET Varg 3) परीक्षा के ‘बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र’ (CDP) खण्ड में आकलन और मूल्यांकन (Assessment and Evaluation) से जुड़े विषय सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। आधुनिक शिक्षा प्रणाली ‘परीक्षा के डर’ को खत्म करके ‘सीखने के आनंद’ पर जोर देती है। इसी उद्देश्य से NCF 2005 और RTE 2009 ने पारंपरिक परीक्षा प्रणाली को बदलकर सी.सी.ई. (CCE) और शाला आधारित आकलन को लागू किया है।

परीक्षा में इस अध्याय से सीधे सैद्धांतिक प्रश्न और पेडागॉजी (स्थिति-आधारित) प्रश्न दोनों पूछे जाते हैं। आपकी परीक्षा की सटीक तैयारी के लिए यह विस्तृत और सर्वांगीण आलेख तैयार किया गया है।

📚 बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) – MPTET Varg 3

अध्याय: अधिगम का आकलन शाला आधारित आकलन और CCE

1. प्रस्तावना: आकलन और मूल्यांकन क्या है? (What is Assessment and Evaluation?)

  • आकलन (Assessment): यह सीखने-सिखाने की प्रक्रिया के दौरान बच्चों की प्रगति, उनकी कमियों और उनके सीखने के तरीके को जानने की एक ‘निरंतर’ प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य सुधार (Improvement) करना है।
  • मूल्यांकन (Evaluation): यह एक व्यापक शब्द है। यह किसी निश्चित अवधि (जैसे वर्ष के अंत) के बाद यह तय करता है कि शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति किस स्तर तक हुई है। इसका उद्देश्य निर्णय (Judgment) लेना या ग्रेड/अंक देना है।

2. अधिगम के लिए आकलन, अधिगम का आकलन और अधिगम के रूप में आकलन

परीक्षा के दृष्टिकोण से इन तीनों के बीच का अंतर समझना एक ‘ब्रह्मास्त्र’ के समान है।

A. अधिगम के लिए आकलन (Assessment FOR Learning)

  • अर्थ: यह आकलन शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) के दौरान (During) होता है।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि बच्चा कैसे सीख रहा है, उसे कहाँ कठिनाई आ रही है, ताकि शिक्षक अपनी शिक्षण विधि में तुरंत सुधार कर सके और बच्चे को उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) दे सके।
  • प्रकृति: यह रचनात्मक या निर्माणात्मक (Formative) होता है। इसमें कोई ग्रेड या पास/फेल का ठप्पा नहीं लगाया जाता।
  • उदाहरण: कक्षा में पढ़ाते समय शिक्षक द्वारा बीच-बीच में प्रश्न पूछना, कोई छोटा सा क्विज़ (Quiz) लेना, या क्लासवर्क देना।

B. अधिगम का आकलन (Assessment OF Learning)

  • अर्थ: यह आकलन शिक्षण प्रक्रिया के अंत में (At the end) होता है। (जैसे- सत्र के अंत में या छमाही परीक्षा)।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य यह मापना है कि बच्चे ने पूरे वर्ष में कितना ज्ञान अर्जित किया है। इसके आधार पर बच्चे को ग्रेड, अंक या कक्षोन्नति (Promotion) दी जाती है।
  • प्रकृति: यह योगात्मक या संकलनात्मक (Summative) होता है। यह सुधार पर नहीं, बल्कि ‘निर्णय’ (Judgment) पर केंद्रित होता है।
  • उदाहरण: वार्षिक बोर्ड परीक्षा, हाफ-ईयरली परीक्षा।

C. अधिगम के रूप में आकलन (Assessment AS Learning)

  • अर्थ: जब बच्चा स्वयं (Self) अपना आकलन करता है या अपने दोस्तों (Peers) का आकलन करता है।
  • उद्देश्य: बच्चे में आत्म-चिंतन (Self-reflection) और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना।
  • उदाहरण: किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने के बाद बच्चे का खुद से पूछना कि “मैंने इसमें क्या अच्छा किया और मैं इसे और बेहतर कैसे कर सकता था?”

📊 तुलनात्मक तालिका (Comparative Table)

विशेषताअधिगम के लिए आकलन (FOR)अधिगम का आकलन (OF)अधिगम के रूप में आकलन (AS)
समयकक्षा के दौरान / निरंतरसत्र या इकाई के अंत मेंसीखने के दौरान (स्वयं द्वारा)
प्रकाररचनात्मक (Formative Assessment)योगात्मक (Summative Assessment)स्व-आकलन (Self-Assessment)
मुख्य लक्ष्यकमियों को पहचानना और सुधारनाउपलब्धि को मापना और ग्रेड देनाआत्म-निरीक्षण और आत्म-सुधार
केंद्रशिक्षक और विद्यार्थी दोनोंमुख्यतः शिक्षक और बोर्डविद्यार्थी स्वयं

3. शाला आधारित आकलन (School-Based Assessment – SBA)

पारंपरिक रूप से, बच्चों का मूल्यांकन बाहरी एजेंसियों (जैसे- राज्य शिक्षा बोर्ड) द्वारा वर्ष के अंत में किया जाता था। इससे बच्चों में अत्यधिक तनाव और भय (Board Exam Phobia) उत्पन्न होता था। इस समस्या को दूर करने के लिए ‘शाला आधारित आकलन’ (SBA) की अवधारणा लाई गई।

अवधारणा (Concept):

शाला आधारित आकलन का अर्थ है कि बच्चों का मूल्यांकन उन शिक्षकों द्वारा किया जाना चाहिए जो उन्हें रोज़ाना पढ़ाते हैं और उनके व्यवहार को करीब से जानते हैं, न कि किसी बाहरी परीक्षक द्वारा जो बच्चे को केवल एक 3 घंटे की उत्तर-पुस्तिका से आंकता है।

शाला आधारित आकलन की विशेषताएँ (Characteristics):

  1. शिक्षक की भूमिका: बाहरी परीक्षक की तुलना में स्कूल का शिक्षक अपने विद्यार्थियों की क्षमताओं, कमजोरियों और उनकी पृष्ठभूमि को बेहतर समझता है।
  2. बाल-केंद्रित और तनावमुक्त: इसमें बच्चे को परीक्षा के नाम पर डराया नहीं जाता। मूल्यांकन खेल, गतिविधियों और प्रोजेक्ट्स के माध्यम से अनौपचारिक रूप से हो जाता है।
  3. बहुआयामी मूल्यांकन: बाहरी बोर्ड परीक्षा केवल किताबी ज्ञान (संज्ञानात्मक पक्ष) का आकलन करती है। SBA बच्चे के खेलकूद, कला, नैतिकता और सामाजिक व्यवहार (सर्वांगीण पक्ष) का भी आकलन करता है।
  4. पारदर्शिता और फीडबैक: शिक्षक माता-पिता को बच्चे की प्रगति के बारे में निरंतर और सटीक फीडबैक दे सकता है।

4. सतत एवं समग्र मूल्यांकन: स्वरूप और प्रथाएं (Continuous and Comprehensive Evaluation – CCE)

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE 2009) की धारा 29(2) के तहत भारत के सभी विद्यालयों में सतत एवं समग्र मूल्यांकन (CCE) लागू किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा के बोझ को कम करना और बच्चे का सर्वांगीण (Holistic) विकास सुनिश्चित करना है।

इस शब्द को दो भागों में समझा जा सकता है:

A. सतत (Continuous)

इसका अर्थ है कि मूल्यांकन वर्ष के अंत में केवल एक बार होने वाली घटना नहीं है, बल्कि यह साल भर चलने वाली एक निरंतर प्रक्रिया (Regular periodicity) है।

  • निदानात्मक (Diagnostic): इसमें लगातार बच्चे की कमजोरियों का पता लगाया जाता है।
  • उपचारात्मक (Remedial): कमियों का पता चलने पर तुरंत सुधार किया जाता है।
  • सतत का अर्थ हर रोज़ टेस्ट लेना नहीं है, बल्कि पढ़ाते समय बच्चों के हाव-भाव और गतिविधियों का ‘लगातार अवलोकन’ (Observation) करना है।

B. समग्र (Comprehensive)

इसका अर्थ है कि मूल्यांकन केवल दिमाग (बुद्धि) का नहीं, बल्कि बच्चे के पूरे व्यक्तित्व (शारीरिक, मानसिक, और संवेगात्मक) का होना चाहिए। इसके दो पक्ष हैं:

  1. शैक्षिक पक्ष (Scholastic Area):
    • इसमें विषयगत ज्ञान (हिंदी, गणित, पर्यावरण, अंग्रेजी आदि) का आकलन होता है। (यह बच्चे के संज्ञानात्मक / Cognitive पक्ष से जुड़ा है)।
  2. सह-शैक्षिक पक्ष (Co-Scholastic Area):
    • इसमें बच्चे का जीवन कौशल (Life skills), खेलकूद, कला, संगीत, नैतिकता, साफ-सफाई, और दूसरों के प्रति उसका व्यवहार शामिल है। (यह बच्चे के भावात्मक / Affective और गामक / Psychomotor पक्ष से जुड़ा है)।

C. CCE की प्रथाएं, मान्यताएं और उपकरण (Practices and Tools of CCE)

CCE को लागू करने के लिए स्कूल कुछ विशिष्ट उपकरणों (Tools) और तकनीकों का उपयोग करते हैं। MPTET वर्ग 3 के लिए ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  1. अवलोकन (Observation):यह प्राथमिक कक्षाओं के लिए सबसे अच्छा उपकरण है। शिक्षक बिना बच्चे को बताए खेल के मैदान या कक्षा में उसके व्यवहार को देखता है और नोट करता है।
  2. पोर्टफोलियो (Portfolio):यह बच्चे के पूरे वर्ष के कार्यों, उपलब्धियों, ड्राइंग, टेस्ट पेपर आदि का एक व्यवस्थित फ़ोल्डर (Collection) होता है। इससे बच्चे की क्रमिक प्रगति (Progress over time) का पता चलता है।
  3. उपाख्यानात्मक अभिलेख (Anecdotal Records):इसमें शिक्षक बच्चे के जीवन से जुड़ी किसी विशिष्ट घटना (जैसे- किसी दिन उसने किसी गरीब बच्चे की मदद की, या अचानक बहुत गुस्सा किया) का लिखित विवरण रखता है।
  4. रूब्रिक्स (Rubrics):यह एक स्कोरिंग गाइड है जिसका उपयोग शिक्षक यह तय करने के लिए करते हैं कि किसी कार्य (जैसे- निबंध या प्रोजेक्ट) में बच्चे को किस आधार पर ग्रेड दिए जाएंगे।
  5. ग्रेडिंग प्रणाली (Grading System):CCE में अंकों (Marks) के बजाय ग्रेड (जैसे- A+, A, B, C) दिए जाते हैं, ताकि बच्चों के बीच अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Unhealthy competition) और हीन भावना को खत्म किया जा सके।

5. कक्षा-कक्ष परिदृश्य: शिक्षकों के लिए शैक्षिक निहितार्थ (Educational Implications)

आप एक भावी शिक्षक हैं, कक्षा में इस ज्ञान का प्रयोग कैसे करेंगे?

  • गलतियों को स्वीकारें: यदि बच्चा कोई गलती करता है, तो उसे डांटें नहीं। गलतियां (Errors) अधिगम प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं। वे आपको यह बताती हैं कि “बच्चा कैसे सोच रहा है।”
  • लेबलिंग (Labeling) से बचें: आकलन का उद्देश्य बच्चों को ‘मंदबुद्धि’, ‘औसत’ या ‘होशियार’ का लेबल लगाना नहीं है। इसका उद्देश्य केवल यह जानना है कि किस बच्चे को किस प्रकार की मदद की आवश्यकता है।
  • विविध तरीकों का प्रयोग: सभी बच्चों का मूल्यांकन केवल ‘पेन-पेपर टेस्ट’ से न करें। कुछ बच्चे लिखकर अच्छा बताते हैं, कुछ बोलकर, तो कुछ प्रोजेक्ट बनाकर। आकलन के तरीकों में विविधता होनी चाहिए।
  • फीडबैक को सकारात्मक रखें: बच्चे को यह न बताएं कि “तुम गणित में बहुत कमजोर हो।” इसके बजाय कहें, “तुम्हारा प्रयास अच्छा है, यदि हम इस फॉर्मूले को इस तरह से समझें, तो तुम इसे बहुत आसानी से हल कर लोगे।”

🌟 MPTET Varg 3 के लिए वन-लाइनर कैप्सूल (Exam Booster) 🌟

  • सी.सी.ई. (CCE) का पूर्ण रूप क्या है?
    • सतत एवं समग्र मूल्यांकन (Continuous and Comprehensive Evaluation)।
  • अधिगम के लिए आकलन (Assessment for learning) की प्रकृति कैसी होती है?
    • रचनात्मक / निर्माणात्मक (Formative)।
  • प्राथमिक स्तर पर बच्चों के मूल्यांकन का सबसे अच्छा तरीका कौन सा है?
    • निरंतर अवलोकन (Observation) और पोर्टफोलियो (Portfolio)।
  • किस प्रकार के आकलन में बच्चे अपना मूल्यांकन स्वयं करते हैं?
    • अधिगम के रूप में आकलन (Assessment as learning)।
  • शाला आधारित आकलन (SBA) का मुख्य लाभ क्या है?
    • यह बच्चों को तनावमुक्त रखता है और शिक्षक (जो बच्चे को सबसे बेहतर जानता है) को मूल्यांकन का अधिकार देता है।
  • समग्र मूल्यांकन (Comprehensive) में ‘सह-शैक्षिक पक्ष’ (Co-scholastic) में क्या शामिल होता है?
    • खेलकूद, कला, जीवन कौशल, मूल्य और अभिवृत्तियां।
  • पोर्टफोलियो (Portfolio) क्या है?
    • एक निश्चित अवधि में विद्यार्थी द्वारा किए गए कार्यों का एक व्यवस्थित संग्रह (Collection of student’s work)।

❓ FAQ: परीक्षा उपयोगी बहुविकल्पीय प्रश्न (Example MCQs for MPTET)

इन प्रश्नों का अभ्यास करके आप परीक्षा में पेडागोजी के प्रश्नों की भाषा और प्रकृति को समझ सकेंगे:

प्रश्न 1: ‘अधिगम के लिए आकलन’ (Assessment for Learning) का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(A) विद्यार्थियों को पास या फेल घोषित करना।

(B) विद्यार्थियों के प्रदर्शन की एक-दूसरे से तुलना करना।

(C) शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान कमियों को पहचानना और सुधार करना।

(D) वर्ष के अंत में रिपोर्ट कार्ड तैयार करना।

उत्तर: (C)

व्याख्या: ‘अधिगम के लिए आकलन’ (Formative Assessment) एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसका एकमात्र उद्देश्य बच्चे की कमियों (निदान) को जानकर शिक्षण विधि में सुधार (उपचार) करना है।

प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन सा उपकरण (Tool) ‘सतत और समग्र मूल्यांकन’ (CCE) का हिस्सा नहीं है?

(A) पोर्टफोलियो (Portfolio)

(B) उपाख्यानात्मक अभिलेख (Anecdotal Records)

(C) अवलोकन (Observation)

(D) केवल रटने की क्षमता जांचने के लिए वार्षिक बोर्ड परीक्षा

उत्तर: (D)

व्याख्या: CCE रटंत विद्या (Rote learning) और केवल वार्षिक परीक्षाओं के सख्त खिलाफ है। यह बच्चे के सर्वांगीण विकास का लगातार आकलन करने पर जोर देता है।

प्रश्न 3: ‘शाला आधारित आकलन’ (School-Based Assessment) को मुख्य रूप से किस सिद्धांत पर पेश किया गया था?

(A) बाहरी परीक्षकों की तुलना में शिक्षक अपने शिक्षार्थियों की क्षमताओं को बेहतर जानते हैं।

(B) स्कूल हर कीमत पर बाहरी परीक्षा निकायों (Board) से बेहतर होते हैं।

(C) छात्रों को कभी भी परीक्षण (Test) नहीं दिया जाना चाहिए।

(D) स्कूलों को अपने स्वयं के ग्रेडिंग नियम बनाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

उत्तर: (A)

व्याख्या: SBA का मूल दर्शन यही है कि जो शिक्षक बच्चे के साथ रोज़ समय बिताता है, वह बच्चे की प्रतिभा और कमजोरियों को किसी 3 घंटे की बोर्ड परीक्षा जांचने वाले अजनबी परीक्षक से कहीं बेहतर समझता है।

प्रश्न 4: एक शिक्षिका अपनी कक्षा के बच्चों को एक प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद खुद से यह सवाल पूछने के लिए कहती है, “मैंने इस प्रोजेक्ट में क्या अच्छा किया और मैं कहाँ सुधार कर सकता था?” शिक्षिका किस बात को बढ़ावा दे रही है?

(A) अधिगम का आकलन (Assessment of learning)

(B) अधिगम के लिए आकलन (Assessment for learning)

(C) अधिगम के रूप में आकलन (Assessment as learning)

(D) योगात्मक मूल्यांकन (Summative Evaluation)

उत्तर: (C)

व्याख्या: जब बच्चा अपना स्व-आकलन (Self-assessment) करता है और अपने ही सीखने की प्रक्रिया पर चिंतन (Reflect) करता है, तो इसे ‘अधिगम के रूप में आकलन’ कहा जाता है।

प्रश्न 5: CCE में ‘समग्र’ (Comprehensive) शब्द से क्या तात्पर्य है?

(A) केवल सभी किताबी विषयों का परीक्षण करना।

(B) शैक्षिक (Scholastic) और सह-शैक्षिक (Co-scholastic) दोनों पक्षों का मूल्यांकन करना।

(C) पूरे साल भर परीक्षण लेना।

(D) पूरे पाठ्यक्रम को रटाना।

उत्तर: (B)

व्याख्या: समग्र (Comprehensive) का अर्थ है बच्चे के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास—जिसमें उसका दिमाग (शैक्षिक विषय) और उसका शरीर/दिल (खेलकूद, कला, नैतिकता – सह-शैक्षिक विषय) दोनों शामिल हों।

आकलन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आपकी शिक्षण विधि बच्चे तक पहुँच पा रही है या नहीं। यदि कक्षा का एक बड़ा हिस्सा असफल होता है, तो इसका अर्थ है कि शिक्षण प्रणाली विफल हुई है, न कि बच्चे।

आपके लिए एक विचारणीय प्रश्न: यदि आपकी कक्षा में एक बच्चा लिखित परीक्षा में हमेशा कम अंक लाता है, लेकिन वह मॉडल बनाने (प्रोजेक्ट कार्य) में सबसे आगे रहता है, तो CCE के सिद्धांतों के आधार पर आप उस बच्चे का मूल्यांकन कैसे करेंगे?

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