Personality and its Measurement : एमपी टीईटी वर्ग 3 (MPTET Varg 3) 2026 परीक्षा के ‘बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र’ (Child Development and Pedagogy – CDP) पाठ्यक्रम में “व्यक्तित्व और उसका मापन” (Personality and its Measurement) एक अत्यधिक महत्वपूर्ण, विस्तृत और तकनीकी अध्याय है।
प्राथमिक कक्षा में एक शिक्षक का सामना विभिन्न प्रकार के बच्चों से होता है। कोई बच्चा कक्षा में बहुत बोलता है और जल्दी दोस्त बना लेता है, कोई बच्चा चुपचाप कोने में बैठना पसंद करता है, तो कोई बच्चा छोटी-छोटी बातों पर आक्रामक हो जाता है। ये सभी भिन्नताएं उनके ‘व्यक्तित्व’ (Personality) का हिस्सा हैं। एक शिक्षक के लिए इन व्यक्तित्वों को वैज्ञानिक तरीके से समझना और मापना बेहद जरूरी है, ताकि वह प्रत्येक बच्चे को उसकी प्रकृति के अनुसार शिक्षा दे सके।
नीचे इस अध्याय पर एक विस्तृत, परीक्षा-केंद्रित और कक्षा-कक्ष के व्यावहारिक उदाहरणों से परिपूर्ण आलेख प्रस्तुत है।
📚 बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) – MPTET Varg 3
अध्याय: व्यक्तित्व और उसका मापन (Personality and its Measurement)
1. प्रस्तावना: व्यक्तित्व का अर्थ और उत्पत्ति (Meaning and Origin of Personality)
सामान्य बोलचाल की भाषा में ‘व्यक्तित्व’ (Personality) का अर्थ व्यक्ति के बाहरी रूप-रंग, शारीरिक गठन और वेशभूषा से लगाया जाता है। यदि कोई व्यक्ति सुंदर है और अच्छे कपड़े पहनता है, तो लोग कहते हैं कि “उसका व्यक्तित्व बहुत अच्छा है।” लेकिन मनोविज्ञान में यह धारणा पूरी तरह से गलत और अधूरी है।
शाब्दिक अर्थ:
अंग्रेजी शब्द ‘Personality’ लैटिन भाषा के शब्द ‘Persona’ (परसोना) से बना है। प्राचीन यूनान (Greece) में नाटकों के दौरान कलाकार अपने चेहरे पर जो ‘मुखौटा’ (Mask) पहनते थे, उसे ‘परसोना’ कहा जाता था।
मनोवैज्ञानिक अर्थ:
आधुनिक मनोविज्ञान के अनुसार, व्यक्तित्व केवल बाहरी दिखावा नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के आंतरिक (मानसिक/संवेगात्मक) और बाह्य (शारीरिक/सामाजिक) गुणों का एक समग्र और अनूठा संगठन है।
व्यक्तित्व की सर्वश्रेष्ठ और सर्वमान्य परिभाषा
गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport – 1937):
“व्यक्तित्व व्यक्ति के भीतर उन मनो-शारीरिक (Psychophysical) संस्थानों का एक गतिशील (Dynamic) संगठन है, जो वातावरण के साथ उसका अद्वितीय (Unique) समायोजन निर्धारित करता है।”
(यह परिभाषा MPTET परीक्षा के लिए ‘रामबाण’ है। इसमें तीन मुख्य बातें हैं: 1. यह मन और शरीर दोनों का संगम है। 2. यह गतिशील है, स्थिर नहीं। 3. यह हर व्यक्ति का अद्वितीय/Unique होता है।)
अन्य महत्वपूर्ण परिभाषाएँ:
- वुडवर्थ (Woodworth): “व्यक्ति के व्यवहार की समग्र विशेषता ही उसका व्यक्तित्व है।”
- वॉटसन (Watson): “हम जो कुछ भी करते हैं, वही हमारा व्यक्तित्व है।”
- गिल्फोर्ड (Guilford): “व्यक्तित्व व्यक्ति के शील-गुणों (Traits) का समन्वित प्रतिरूप है।”
2. व्यक्तित्व के प्रकार / वर्गीकरण (Theories and Types of Personality)
मनोवैज्ञानिकों ने व्यक्तित्व को अलग-अलग दृष्टिकोणों से बाँटा है। परीक्षा में इन वर्गीकरणों से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
A. शारीरिक रचना के आधार पर (Based on Physical Structure)
1. अर्न्स्ट क्रेचमर (Ernst Kretschmer) का वर्गीकरण:
जर्मन मनोवैज्ञानिक क्रेचमर ने शरीर की बनावट के आधार पर 4 प्रकार बताए:
- पिकनिक (Pyknic / नाटे और मोटे): कद छोटा, शरीर भारी, गर्दन छोटी। ये लोग खुशमिजाज, सामाजिक और आराम-पसंद होते हैं (इन्हें Cycloid भी कहा जाता है)।
- एस्थेनिक (Asthenic / दुबले-पतले): लंबा कद, कमजोर शरीर। ये लोग शर्मीले, एकांतप्रिय, संवेदनशील और अक्सर चिड़चिड़े होते हैं (इन्हें Schizoid भी कहा जाता है)।
- एथलेटिक (Athletic / सुडौल): मजबूत मांसपेशियां, संतुलित शरीर। ये फुर्तीले, साहसी और परिस्थितियों से तालमेल बिठाने वाले होते हैं।
- डिसप्लास्टिक (Dysplastic / मिश्रित): ऊपर दिए गए तीनों प्रकारों का मिला-जुला रूप।
2. विलियम शेल्डन (William Sheldon) का वर्गीकरण:
शेल्डन ने भी शारीरिक गठन के आधार पर 3 प्रकार बताए (जो क्रेचमर से मिलते-जुलते हैं):
- एंडोमॉर्फिक (Endomorphic / गोलाकार): मोटे, आराम-पसंद, भोजन-भट्ट और खुशमिजाज (क्रेचमर के ‘पिकनिक’ के समान)।
- मेसोमॉर्फिक (Mesomorphic / आयताकार): गठीला शरीर, मजबूत, साहसी, और ऊर्जावान (क्रेचमर के ‘एथलेटिक’ के समान)।
- एक्टोमॉर्फिक (Ectomorphic / लंबाकार): दुबले-पतले, शर्मीले, अकेले रहने वाले और जल्दी घबराने वाले (क्रेचमर के ‘एस्थेनिक’ के समान)।
B. मनोवैज्ञानिक आधार पर (Based on Psychological Traits) – [सर्वाधिक महत्वपूर्ण]
कार्ल जुंग / युंग (Carl Jung) का वर्गीकरण:
स्विट्जरलैंड के मनोवैज्ञानिक कार्ल जुंग ने सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction) के आधार पर व्यक्तित्व के प्रकार बताए, जो आज भी सबसे अधिक मान्य हैं:
- अंतर्मुखी (Introvert):
- विशेषताएँ: ये लोग शर्मीले होते हैं, कम बोलते हैं, अकेले रहना पसंद करते हैं। ये अपने विचारों में खोए रहते हैं, जल्दी दोस्त नहीं बनाते और अपनी भावनाएं आसानी से व्यक्त नहीं करते।
- उदाहरण: दार्शनिक, वैज्ञानिक, लेखक, कवि, और विचारक।
- बहिर्मुखी (Extrovert):
- विशेषताएँ: ये लोग बहुत बातूनी होते हैं, भीड़ और समाज में रहना पसंद करते हैं। ये जल्दी दोस्त बनाते हैं, आशावादी होते हैं और काम करने में विश्वास रखते हैं।
- उदाहरण: राजनेता, समाज सुधारक, शिक्षक, सेल्समैन, और अभिनेता।
- उभयमुखी (Ambivert):
- विशेषताएँ: आधुनिक मनोवैज्ञानिकों ने जुंग के सिद्धांत में यह तीसरा प्रकार जोड़ा। दुनिया के अधिकांश (लगभग 70-80%) लोग उभयमुखी होते हैं। इनमें अंतर्मुखी और बहिर्मुखी दोनों के गुण होते हैं। ये परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं।
C. शील-गुण सिद्धांत (Trait Theory of Personality)
गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) और रेमंड कैटल (Raymond Cattell) इसके मुख्य समर्थक हैं।
- शील-गुण (Traits) का अर्थ है व्यक्ति के व्यवहार की वह स्थायी विशेषता जो हर परिस्थिति में दिखाई देती है (जैसे- ईमानदारी, आक्रामकता, दयालुता)।
- ऑलपोर्ट ने शील-गुणों को तीन भागों में बांटा:
- कार्डिनल (Cardinal): वह गुण जो व्यक्ति के पूरे जीवन पर हावी रहता है। (जैसे- गांधीजी की अहिंसा, हिटलर की क्रूरता)।
- केंद्रीय (Central): सामान्य गुण जो हर व्यक्ति में 5-10 की संख्या में होते हैं (जैसे- ईमानदारी, सामाजिकता)।
- गौण (Secondary): वे गुण जो कभी-कभी दिखते हैं (जैसे- कपड़े पहनने का खास तरीका)।
- कैटल (Cattell) ने 16 P.F. (Personality Factor) नामक प्रसिद्ध प्रश्नावली का निर्माण किया था।
3. व्यक्तित्व का मापन (Measurement of Personality)
यह इस अध्याय का सबसे तकनीकी और परीक्षा-उपयोगी हिस्सा है। बुद्धि (IQ) को मापना आसान है क्योंकि उसमें सही या गलत उत्तर होते हैं, लेकिन व्यक्तित्व को मापना अत्यंत कठिन है क्योंकि हर इंसान अलग होता है।
व्यक्तित्व मापन की विधियों को मुख्य रूप से 3 भागों में बाँटा गया है:
A. आत्मनिष्ठ / व्यक्तिनिष्ठ विधियां (Subjective Methods)
इन विधियों में व्यक्ति स्वयं अपने बारे में जानकारी देता है। इसमें पक्षपात (Bias) की संभावना सबसे अधिक होती है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपनी बुराई नहीं बताना चाहता।
- साक्षात्कार (Interview): परीक्षक और परीक्षार्थी के बीच आमने-सामने की बातचीत। (यह सबसे अधिक उपयोग होने वाली विधि है)।
- प्रश्नावली (Questionnaire): व्यक्ति को प्रश्नों की एक सूची दी जाती है, जिसका उत्तर उसे ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में देना होता है।
- आत्मकथा (Autobiography): व्यक्ति को अपने जीवन के अनुभवों को स्वयं लिखने के लिए कहा जाता है।
- इतिहास गाथा विधि (Case Study): इसका प्रयोग मुख्य रूप से समस्यात्मक बालकों, अपराधियों या मानसिक रोगियों पर किया जाता है। (प्रतिपादक: टाइडमैन)।
B. वस्तुनिष्ठ विधियां (Objective Methods)
इनमें व्यक्ति के व्यवहार का निष्पक्ष रूप से अध्ययन किया जाता है।
- निरीक्षण / अवलोकन विधि (Observation Method): शिक्षक दूर बैठकर बच्चे के व्यवहार (कक्षा या खेल के मैदान में) को देखता है और नोट करता है। (प्रतिपादक: जे.बी. वाटसन)।
- निर्धारण मापनी (Rating Scale): इसमें किसी बच्चे के गुण को एक स्केल पर मापा जाता है (जैसे- बहुत अच्छा, अच्छा, सामान्य, खराब, बहुत खराब)।
- समाजमिति विधि (Sociometry): इसका प्रयोग बच्चे के ‘सामाजिक गुणों’ को मापने के लिए होता है। (जैसे- कक्षा में पूछा जाए कि आप किसके साथ बैठना पसंद करेंगे?)। (प्रतिपादक: जे.एल. मोरेनो)।
C. प्रक्षेपी विधियां (Projective Methods) – [MPTET के लिए सबसे महत्वपूर्ण (V.V.I.P)]
‘प्रक्षेपण’ (Projection) का अर्थ है अपनी दबी हुई भावनाओं, इच्छाओं या विचारों को किसी बाहरी वस्तु (चित्र, स्याही के धब्बे) पर थोप देना। चूँकि व्यक्ति को पता नहीं होता कि उसका परीक्षण हो रहा है, इसलिए वह सच उगल देता है। इसमें अचेतन मन (Unconscious mind) का अध्ययन किया जाता है।
1. रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण (Rorschach Inkblot Test – IBG):
- प्रतिपादक: हरमन रोर्शा (Hermann Rorschach – 1921), स्विट्जरलैंड।
- उपकरण: कुल 10 कार्ड होते हैं जिन पर स्याही के अस्पष्ट धब्बे बने होते हैं।
- 5 कार्ड: काले और सफेद (Black & White)।
- 2 कार्ड: काले, सफेद और लाल (Black, White & Red)।
- 3 कार्ड: बहुरंगी (Multi-colored)।
- प्रक्रिया: व्यक्ति को कार्ड दिखाकर पूछा जाता है कि उसे धब्बे में क्या दिखाई दे रहा है। (कोई उसे चमगादड़ बताता है, कोई दो इंसानों को लड़ते हुए)। उसके उत्तरों के आधार पर व्यक्तित्व (विशेषकर मानसिक रोगों) का पता लगाया जाता है।
2. प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण (Thematic Apperception Test – TAT):
- प्रतिपादक: मॉर्गन और मुर्रे (Morgan & Murray – 1935)।
- आयु वर्ग: 14 वर्ष से अधिक आयु (किशोरों और वयस्कों) के लिए।
- उपकरण: कुल 31 कार्ड (30 पर चित्र होते हैं + 1 खाली होता है)।
- 10 कार्ड केवल पुरुषों के लिए।
- 10 कार्ड केवल महिलाओं के लिए।
- 10 कार्ड दोनों (Mix) के लिए।
- परीक्षार्थी पर अधिकतम 20 कार्ड (19 चित्र + 1 खाली) का ही प्रयोग किया जाता है।
- प्रक्रिया: व्यक्ति को कार्ड पर बना अस्पष्ट चित्र (जैसे- एक रोती हुई औरत और पीछे खड़ा आदमी) दिखाया जाता है और उसे उस चित्र पर एक कहानी (Story) लिखने को कहा जाता है। कहानी लिखते समय व्यक्ति चित्र के पात्र में खुद को ढाल लेता है (Identification) और अपने अचेतन मन की चिंताएं लिख देता है।
3. बाल अंतर्बोध परीक्षण (Children’s Apperception Test – CAT):
- प्रतिपादक: लियोपोल्ड बेलक (Leopold Bellak – 1948)।
- आयु वर्ग:3 से 11 वर्ष के बच्चों के लिए (MPTET वर्ग 3 के लिए सबसे प्रासंगिक)।
- उपकरण: कुल 10 कार्ड। इन कार्डों पर इंसानों के बजाय जानवरों (Animals) के चित्र बने होते हैं (क्योंकि छोटे बच्चे जानवरों से जल्दी जुड़ते हैं)।
- प्रक्रिया: बच्चों को जानवरों के चित्र दिखाकर कहानी बनाने को कहा जाता है (जैसे- बिल्ली चूहों के पीछे भाग रही है)। इससे बच्चे के पारिवारिक रिश्ते, असुरक्षा और मानसिक स्थिति का पता चलता है।
4. शब्द साहचर्य परीक्षण (Word Association Test – WAT):
- प्रतिपादक: फ्रांसिस गाल्टन (बाद में जुंग ने भी प्रयोग किया)।
- प्रक्रिया: परीक्षक एक शब्द बोलता है और व्यक्ति को वह शब्द सुनकर जो पहला शब्द याद आए, वह बोलना होता है। (जैसे- परीक्षक: “रात”, परीक्षार्थी: “डर”)। प्रतिक्रिया में लगने वाले समय (Reaction time) को भी नोट किया जाता है।
4. व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Personality)
बच्चे का व्यक्तित्व किसी एक दिन में नहीं बनता। यह आनुवंशिकता और वातावरण की निरंतर अंतःक्रिया का परिणाम है।
- जैविक / वंशानुगत कारक (Biological Factors):
- शारीरिक संरचना, रंग-रूप, स्नायुमंडल (Nervous System) और अंतःस्रावी ग्रंथियां (Endocrine glands)। यदि थायराइड ग्रंथि ठीक से काम न करे, तो बच्चा सुस्त और चिड़चिड़ा (Personality change) हो जाता है।
- पारिवारिक वातावरण (Family Environment):
- माता-पिता का पालन-पोषण। यदि परिवार में हमेशा झगड़ा होता है, तो बच्चा सहमा हुआ (अंतर्मुखी) या विद्रोही बन जाता है।
- विद्यालय और साथी (School and Peers):
- शिक्षक का व्यवहार व्यक्तित्व निर्माण में मील का पत्थर है। यदि शिक्षक कठोर है, तो बच्चे में हीन भावना आती है। दोस्तों (Peer group) के प्रभाव से बच्चा नेतृत्व, सहयोग या कभी-कभी बुरी आदतें सीखता है।
- सांस्कृतिक कारक (Cultural Factors):
- समाज के रीति-रिवाज और मूल्य। (जैसे- भारतीय संस्कृति में बच्चों का बड़ों का पैर छूना उनके व्यक्तित्व का ‘संस्कारी’ हिस्सा माना जाता है)।
5. कक्षा-कक्ष में शिक्षकों के लिए व्यावहारिक शैक्षिक निहितार्थ (Pedagogical Implications for MPTET Varg 3)
एक प्राथमिक शिक्षक के रूप में आपको इस अध्याय का ज्ञान अपनी कक्षा में कैसे लागू करना है?
- विभेदित दृष्टिकोण अपनाना (Differentiated Approach):
- शिक्षक को यह समझना चाहिए कि अंतर्मुखी (Introvert) बच्चा अचानक मंच पर आकर भाषण नहीं दे सकता। उसे डांटने के बजाय धीरे-धीरे लिखित कार्यों से मौखिक कार्यों की ओर ले जाना चाहिए।
- बहिर्मुखी (Extrovert) बच्चे को कक्षा मॉनिटर या समूह का लीडर बनाया जा सकता है, जिससे उसकी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग हो।
- मूल्यांकन में सावधानी:
- केवल लिखित परीक्षा (IQ) से बच्चे को न आंकें। यदि बच्चा शांत है, तो उसकी कॉपियों (ड्राइंग, कहानी लेखन) से उसके व्यक्तित्व (Projective technique) को समझने का प्रयास करें।
- समस्यात्मक बालकों की पहचान (Identifying Problematic Children):
- यदि कोई बच्चा अचानक बहुत आक्रामक हो गया है या कक्षा से भागने लगा है, तो शिक्षक को ‘इतिहास गाथा विधि’ (Case Study) का प्रयोग करके उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का पता लगाना चाहिए।
- सकारात्मक रोल मॉडल बनना (Being a Positive Role Model):
- अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत के अनुसार, बच्चे शिक्षक को देखकर (Imitation) अपना व्यक्तित्व बनाते हैं। अतः शिक्षक का अपना व्यक्तित्व (सहनशील, निष्पक्ष, समय का पाबंद) अनुकरणीय होना चाहिए।
- CAT (Children’s Apperception Test) का ज्ञान:
- चूंकि आप प्राथमिक बच्चों (6-11 वर्ष) को पढ़ाएंगे, इसलिए आपको पता होना चाहिए कि बच्चे कहानियों या जानवरों के चित्रों के माध्यम से अपने मन का डर बहुत आसानी से व्यक्त कर देते हैं।
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- प्रश्न: ‘परसोना’ (Persona) शब्द किस भाषा से लिया गया है और इसका अर्थ क्या है?
- उत्तर: लैटिन भाषा; अर्थ – मुखौटा (Mask)।
- प्रश्न: “व्यक्तित्व मनो-शारीरिक संस्थानों का गतिशील संगठन है”, यह प्रसिद्ध परिभाषा किसकी है?
- उत्तर: गॉर्डन ऑलपोर्ट (G.W. Allport)।
- प्रश्न: कार्ल जुंग (Carl Jung) ने व्यक्तित्व का वर्गीकरण किस आधार पर किया?
- उत्तर: मनोवैज्ञानिक आधार पर (अंतर्मुखी, बहिर्मुखी, उभयमुखी)।
- प्रश्न: TAT (Thematic Apperception Test) का निर्माण किसने किया?
- उत्तर: मॉर्गन और मुर्रे (Morgan & Murray) ने।
- प्रश्न: 3 से 11 वर्ष के बच्चों के व्यक्तित्व मापन के लिए कौन सा परीक्षण सबसे उपयुक्त है?
- उत्तर: CAT (Children’s Apperception Test) – लियोपोल्ड बेलक द्वारा।
- प्रश्न: रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण में कुल कितने कार्ड होते हैं?
- उत्तर: 10 कार्ड (5 B/W, 2 B/W/Red, 3 बहुरंगी)।
- प्रश्न: अचेतन मन (Unconscious mind) का अध्ययन करने के लिए कौन सी विधियां सर्वोत्तम मानी जाती हैं?
- उत्तर: प्रक्षेपी विधियां (Projective Methods)।
- प्रश्न: 16 P.F. (Personality Factor) प्रश्नावली का निर्माण किसने किया?
- उत्तर: रेमंड कैटल (Raymond Cattell)।
❓ FAQ: परीक्षा उपयोगी बहुविकल्पीय प्रश्न (Example MCQs for MPTET)
इन प्रश्नों के माध्यम से अपनी तैयारी का स्व-मूल्यांकन करें:
प्रश्न 1: आपकी कक्षा में एक छात्र है जो बहुत शर्मीला है, दूसरों से बातचीत करने से बचता है, और अकेले किताबें पढ़ना पसंद करता है। कार्ल जुंग के अनुसार इस छात्र का व्यक्तित्व किस प्रकार का है?
(A) बहिर्मुखी (Extrovert)
(B) अंतर्मुखी (Introvert)
(C) उभयमुखी (Ambivert)
(D) एस्थेनिक (Asthenic)
उत्तर: (B)
व्याख्या: जो लोग अपनी भावनाओं को अंदर रखते हैं, शर्मीले होते हैं और एकांतप्रिय होते हैं, उन्हें जुंग ने ‘अंतर्मुखी’ कहा है। शिक्षक को ऐसे बच्चों को धीरे-धीरे सामाजिक गतिविधियों में शामिल करना चाहिए।
प्रश्न 2: व्यक्तित्व मापन की ‘प्रक्षेपी विधियों’ (Projective Techniques) का मुख्य उद्देश्य क्या मापना होता है?
(A) बच्चे की बुद्धिलब्धि (IQ)
(B) बच्चे का शारीरिक स्वास्थ्य
(C) बच्चे का अचेतन मन (Unconscious mind) और दबी हुई भावनाएं
(D) बच्चे की गणितीय क्षमता
उत्तर: (C)
व्याख्या: प्रक्षेपी विधियों (जैसे TAT, CAT, Rorschach) का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के अचेतन मन में दबी कुंठाओं, इच्छाओं और संघर्षों को बाहर निकालना है, जिन्हें वह सीधे तौर पर बताने से कतराता है।
प्रश्न 3: ‘बाल अंतर्बोध परीक्षण’ (CAT – Children’s Apperception Test) के संबंध में कौन सा कथन सत्य है?
(A) इसका प्रयोग केवल वयस्कों पर किया जाता है।
(B) इसके कार्ड्स पर पुरुषों और महिलाओं के चित्र बने होते हैं।
(C) इसका निर्माण मॉर्गन और मुर्रे ने किया था।
(D) इसके कार्ड्स पर जानवरों (Animals) के चित्र बने होते हैं और यह 3 से 11 वर्ष के बच्चों के लिए है।
उत्तर: (D)
व्याख्या: CAT का निर्माण लियोपोल्ड बेलक ने किया था। इसमें 10 कार्ड होते हैं जिन पर जानवरों के चित्र होते हैं, क्योंकि छोटे बच्चे इंसानों की तुलना में जानवरों (कुत्ता, बिल्ली, शेर) के चित्रों से खुद को जल्दी जोड़ (Identify) लेते हैं।
प्रश्न 4: विलियम शेल्डन (William Sheldon) के अनुसार जो व्यक्ति मोटे, नाटे, आराम-पसंद और खुशमिजाज होते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?
(A) एंडोमॉर्फिक (Endomorphic / गोलाकार)
(B) मेसोमॉर्फिक (Mesomorphic / आयताकार)
(C) एक्टोमॉर्फिक (Ectomorphic / लंबाकार)
(D) शर्मीले
उत्तर: (A)
व्याख्या: शेल्डन ने शारीरिक बनावट के आधार पर वर्गीकरण किया था। मोटे और खुशमिजाज लोग एंडोमॉर्फिक होते हैं। (क्रेचमर ने इन्हें ‘पिकनिक’ कहा था)।
प्रश्न 5: एक प्राथमिक शिक्षक के रूप में, यदि आपकी कक्षा में एक ‘समस्यात्मक बालक’ (Problematic Child) है जो लगातार चोरी करता है और झगड़ता है, तो उसके इस व्यवहार के मूल कारणों को जानने के लिए आप किस विधि का प्रयोग करेंगे?
(A) समाजमिति विधि (Sociometry)
(B) इतिहास गाथा विधि (Case Study Method)
(C) प्रश्नावली विधि (Questionnaire)
(D) रोर्शा परीक्षण
उत्तर: (B)
व्याख्या: ‘केस स्टडी’ (Case Study) विधि का उपयोग किसी विशेष व्यक्ति के जीवन की गहराई से जाँच करने के लिए किया जाता है। इसमें शिक्षक बच्चे के माता-पिता, पड़ोसियों और पुराने दोस्तों से बात करके उसके असामाजिक व्यवहार की जड़ तक पहुँचने का प्रयास करता है।
प्रश्न 6: “व्यक्तित्व व्यक्ति के उन मनो-शारीरिक तंत्रों का गतिशील संगठन है जो वातावरण में उसके अपूर्व समायोजन को निर्धारित करता है।” यह परिभाषा किसने दी है?
(A) जे. बी. वाटसन
(B) गॉर्डन ऑलपोर्ट
(C) कार्ल जुंग
(D) ई. एल. थार्नडाइक
उत्तर: (B)
व्याख्या: गॉर्डन ऑलपोर्ट की यह परिभाषा व्यक्तित्व मनोविज्ञान में सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक मानी जाती है, क्योंकि यह शारीरिक और मानसिक दोनों पक्षों को शामिल करती है।
अंतिम संदेश:
प्रिय भावी शिक्षकों, व्यक्तित्व कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे एक तराजू पर तौला जा सके। यह एक कला और विज्ञान का अद्भुत मिश्रण है। जब आप अपनी कक्षा में प्रवेश करें, तो याद रखें कि आपके सामने बैठे 30 बच्चे 30 अलग-अलग ‘अद्वितीय व्यक्तित्व’ (Unique Personalities) हैं। किसी को प्यार से समझाना पड़ेगा, किसी को जिम्मेदारी देकर। व्यक्तित्व मापन का ज्ञान आपको एक साधारण शिक्षक से एक ‘सहानुभूतिपूर्ण मनोवैज्ञानिक शिक्षक’ (Empathetic Psychological Teacher) में बदल देता है। इस दृष्टिकोण के साथ अपनी MPTET परीक्षा की तैयारी करें, सफलता अवश्य मिलेगी!
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