वंशानुक्रम एवं वातावरण का प्रभाव Influence of Heredity and Environment

Influence of Heredity and Environment : एमपी टीईटी वर्ग 3 (MPTET Varg 3) 2026 परीक्षा के ‘बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र’ (CDP) पाठ्यक्रम में “वंशानुक्रम एवं वातावरण का प्रभाव” (Influence of Heredity and Environment) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत अध्याय है। एक प्राथमिक शिक्षक के रूप में जब आप अपनी कक्षा में विभिन्न बच्चों को देखते हैं, तो आप पाते हैं कि कोई बच्चा पढ़ाई में बहुत तेज है, कोई खेल में, कोई शांत स्वभाव का है, तो कोई चंचल। यह विविधता (Individual Differences) मुख्य रूप से इन्हीं दो कारकों—वंशानुक्रम और वातावरण—की अंतःक्रिया का परिणाम होती है।

आगामी परीक्षा की तैयारी को ध्यान में रखते हुए, यह विस्तृत और परीक्षा-केंद्रित आलेख तैयार किया गया है। इसमें सैद्धांतिक ज्ञान, प्रमुख मनोवैज्ञानिकों के सिद्धांत, शैक्षिक निहितार्थ और अंत में MPTET परीक्षा के स्तर के बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) शामिल किए गए हैं।

📚 बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) – MPTET Varg 3

अध्याय: वंशानुक्रम एवं वातावरण का प्रभाव

(Influence of Heredity and Environment)

1. प्रस्तावना (Introduction)

मानव विकास कभी भी शून्य में नहीं होता। जन्म से लेकर मृत्यु तक एक व्यक्ति जो कुछ भी बनता है, वह उसकी जन्मजात क्षमताओं और उसके आस-पास की परिस्थितियों का ही मिला-जुला रूप है। मनोविज्ञान में, वंशानुक्रम को प्रकृति (Nature) और वातावरण को पोषण (Nurture) कहा जाता है।

प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक आर. एस. वुडवर्थ (R.S. Woodworth) के अनुसार, “व्यक्ति का विकास केवल वंशानुक्रम या केवल वातावरण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह इन दोनों की गुणात्मक अंतःक्रिया का परिणाम है।”

$Development = Heredity \times Environment$

2. वंशानुक्रम (Heredity) का अर्थ एवं तंत्र

वंशानुक्रम क्या है?

सरल शब्दों में, माता-पिता और पूर्वजों से संतानों में शारीरिक और मानसिक गुणों का हस्तांतरण ही वंशानुक्रम कहलाता है। बच्चे की आंखों का रंग, बालों की बनावट, शारीरिक ढांचा और कुछ हद तक उसकी जन्मजात बुद्धि (Innate Intelligence) वंशानुक्रम द्वारा ही निर्धारित होती है।

जेम्स ड्रेवर (James Drever) के अनुसार: “माता-पिता की शारीरिक एवं मानसिक विशेषताओं का संतानों में हस्तांतरण होना ही वंशानुक्रम है।”

रुथ बेनेडिक्ट (Ruth Benedict) के अनुसार: “वंशानुक्रम माता-पिता से संतानों को प्राप्त होने वाले गुण हैं।”

वंशानुक्रम की जैविक प्रक्रिया (Biological Mechanism of Heredity)

MPTET परीक्षा में इस जैविक प्रक्रिया से अक्सर तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं:

  • मानव शरीर कोशिकाओं (Cells) से बना है। गर्भाधान (Conception) के समय माता के अंडाणु (Ovum) और पिता के शुक्राणु (Sperm) के मिलने से युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है, जो मानव जीवन की पहली कोशिका है।
  • प्रत्येक मानव कोशिका में 46 गुणसूत्र (Chromosomes) होते हैं, जो 23 जोड़ों (Pairs) में पाए जाते हैं। (23 माता से और 23 पिता से)।
  • इन 23 जोड़ों में से 22 जोड़े पुरुष और महिला दोनों में समान होते हैं, जिन्हें ऑटोसोम्स (Autosomes) कहा जाता है।
  • 23वां जोड़ा लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosome) कहलाता है, जो बच्चे का लिंग निर्धारित करता है।
    • महिलाओं में: 23वां जोड़ा XX होता है।
    • पुरुषों में: 23वां जोड़ा XY होता है।
  • यदि पिता का X गुणसूत्र माता के X से मिलता है, तो लड़की (XX) का जन्म होता है। यदि पिता का Y गुणसूत्र माता के X से मिलता है, तो लड़के (XY) का जन्म होता है।
  • इन गुणसूत्रों के भीतर सूक्ष्म कण पाए जाते हैं जिन्हें जीन्स (Genes) कहा जाता है। जीन्स ही वंशानुक्रम के वास्तविक वाहक (Carriers of Heredity) होते हैं।

3. वंशानुक्रम के प्रमुख सिद्धांत / नियम (Principles of Heredity)

वंशानुक्रम कैसे कार्य करता है, इसे समझने के लिए मनोवैज्ञानिकों और जीव विज्ञानियों ने कुछ नियम दिए हैं:

  1. बीजकोष की निरंतरता का नियम (Law of Continuity of Germplasm):
    • प्रतिपादक: वीजमैन (Weismann)
    • इस नियम के अनुसार, शरीर का निर्माण करने वाला ‘बीजकोष’ (Germplasm) कभी नष्ट नहीं होता। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में निरंतर चलता रहता है। माता-पिता केवल इस बीजकोष के संरक्षक (Trustees) होते हैं, निर्माता नहीं।
  2. समानता का नियम (Law of Resemblance):
    • “जैसे माता-पिता, वैसी संतान।” बुद्धिमान माता-पिता की संतान बुद्धिमान और मंदबुद्धि माता-पिता की संतान मंदबुद्धि होती है।
  3. भिन्नता का नियम (Law of Variation):
    • माता-पिता की संतानें पूरी तरह से उनके जैसी न होकर कुछ अलग (भिन्न) होती हैं। एक ही माता-पिता के दो बच्चों (जुड़वा को छोड़कर) में भी रंग-रूप और बुद्धि में भिन्नता पाई जाती है। इसका कारण जीन्स का अलग-अलग तरीके से संयोजित होना है।
  4. प्रत्यागमन का नियम (Law of Regression):
    • इस नियम के अनुसार, संतानों में माता-पिता के विपरीत गुण पाए जाते हैं। बहुत प्रतिभाशाली माता-पिता की संतान का सामान्य या मंदबुद्धि होना, और मंदबुद्धि माता-पिता की संतान का प्रतिभाशाली होना, प्रत्यागमन (पीछे की ओर लौटना) कहलाता है।
  5. अर्जित गुणों के संक्रमण / असंक्रमण का नियम:
    • लैमार्क (Lamarck) का मानना था कि माता-पिता द्वारा अपने जीवनकाल में अर्जित किए गए गुण (जैसे- जिराफ की लंबी गर्दन) अगली पीढ़ी में हस्तांतरित होते हैं (संक्रमण का नियम)।
    • इसके विपरीत, डार्विन (Darwin) और वीजमैन ने इसे नकारते हुए ‘असंक्रमण’ का नियम दिया, जिसके अनुसार अर्जित गुण (जैसे पहलवान की मांसपेशियां या कटी हुई पूंछ) संतानों में नहीं जाते। (आधुनिक विज्ञान डार्विन और वीजमैन का समर्थन करता है)।
  6. मेंडल का नियम (Mendel’s Law):
    • ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Johann Mendel) को ‘आनुवंशिकी का जनक’ (Father of Genetics) कहा जाता है। उन्होंने मटर के पौधों और चूहों पर प्रयोग किए और यह सिद्ध किया कि वर्णसंकर (Hybrid) प्राणी अंततः अपने मूल (Dominant) रूप की ओर ही लौटते हैं।

4. वातावरण (Environment) का अर्थ एवं प्रकार

वातावरण क्या है?

वातावरण (पर्यावरण या Nurture) शब्द दो शब्दों ‘परि’ (चारों ओर) और ‘आवरण’ (ढकने वाला) से बना है। जन्म से लेकर मृत्यु तक जो कुछ भी व्यक्ति को बाहर से प्रभावित करता है (जीन्स को छोड़कर), वह वातावरण है।

रॉस (Ross) के अनुसार: “वातावरण वह कोई भी बाहरी शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है।”

एनास्टेसी (Anastasi) के अनुसार: “वातावरण वह हर चीज़ है जो व्यक्ति के जीन्स के अलावा उसे प्रभावित करती है।”

वातावरण के प्रकार (Types of Environment)

  1. आंतरिक वातावरण (Internal / Prenatal Environment): यह माता के गर्भ का वातावरण है। गर्भावस्था के दौरान माता का पोषण, उसका शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य, और उसके द्वारा ली गई दवाइयां या नशीले पदार्थ (Teratogens) भ्रूण के विकास को गहराई से प्रभावित करते हैं।
  2. बाह्य वातावरण (External Environment): जन्म के बाद बालक जिस परिवेश में रहता है। इसे आगे बाँटा जा सकता है:
    • भौतिक वातावरण (Physical): जलवायु, मौसम, भौगोलिक स्थिति (जैसे- ठंडे प्रदेशों के लोग गोरे और लंबे होते हैं)।
    • सामाजिक वातावरण (Social): परिवार, माता-पिता का पालन-पोषण, स्कूल, शिक्षक, सहपाठी (Peer group), और समाज।
    • सांस्कृतिक वातावरण (Cultural): समाज के रीति-रिवाज, धर्म, परंपराएं, और मूल्य।
    • मनोवैज्ञानिक वातावरण (Psychological): बच्चे को मिलने वाला प्रेम, स्नेह, सुरक्षा, या इसके विपरीत भय और तनाव का माहौल।

5. बाल विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण का प्रभाव (Impact on Child Development)

विकास का आयाम (Domain)वंशानुक्रम का प्रभाव (Impact of Heredity)वातावरण का प्रभाव (Impact of Environment)
शारीरिक विकास (Physical)शारीरिक ढांचा, ऊंचाई, आंखों और बालों का रंग मुख्य रूप से जीन्स तय करते हैं। कुछ जन्मजात रोग (वर्णांधता) भी इसी से आते हैं।उचित पोषण, आहार, खेलकूद और स्वास्थ्य सुविधाएं शारीरिक विकास की गुणवत्ता को सुधारती हैं।
मानसिक / संज्ञानात्मक (Mental)जन्मजात बुद्धि (IQ) की अधिकतम सीमा वंशानुक्रम द्वारा निर्धारित होती है। (Heredity sets the limit).अच्छे शैक्षिक अवसर, किताबें, और एक समृद्ध विद्यालयी माहौल उस बुद्धि को निखारने का काम करता है।
संवेगात्मक विकास (Emotional)बच्चे का मूल स्वभाव (Temperament) जन्म से ही निर्धारित होता है (जैसे कुछ बच्चे जन्म से ही शांत या चिड़चिड़े होते हैं)।परिवार का प्रेमपूर्ण या तनावपूर्ण माहौल बच्चे को संवेगात्मक रूप से स्थिर या अस्थिर बनाता है।
सामाजिक विकास (Social)अंतर्मुखी (Introvert) या बहिर्मुखी (Extrovert) होने की स्वाभाविक प्रवृत्ति जीन्स से प्रभावित होती है।समाज के नियम, मित्र-मंडली और स्कूल बच्चे को एक सामाजिक प्राणी बनाते हैं और नैतिकता सिखाते हैं।

6. प्रकृति-पोषण विवाद (Nature vs. Nurture Debate)

बाल मनोविज्ञान के क्षेत्र में यह एक सदियों पुराना और सबसे चर्चित विवाद है। MPTET परीक्षा में यहाँ से प्रश्न निश्चित रूप से बनते हैं।

  • प्रकृति (Nature): यह ‘वंशानुक्रम’ (Heredity) का प्रतीक है। प्रकृति समर्थकों (जैसे फ्रांसिस गाल्टन) का मानना है कि बच्चे का विकास पूर्व-निर्धारित होता है। बच्चा जन्म से जो गुण लेकर आता है, वही उसके जीवन की दिशा तय करते हैं। इसे बदलना लगभग असंभव है।
  • पोषण (Nurture): यह ‘वातावरण’ (Environment) का प्रतीक है। पोषण समर्थकों (विशेषकर व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिकों जैसे जे.बी. वाटसन) का मानना है कि वातावरण सर्वोपरि है।
    • वाटसन का प्रसिद्ध कथन: “तुम मुझे एक दर्जन स्वस्थ बच्चे दो, मैं उन्हें वैसा वातावरण दूँगा कि वे डॉक्टर, वकील, इंजीनियर या चोर, जो चाहो बन जाएंगे।”

आधुनिक और सर्वमान्य दृष्टिकोण:

आज का बाल मनोविज्ञान न तो अतिवादी ‘प्रकृति’ को मानता है और न ही अतिवादी ‘पोषण’ को। आधुनिक दृष्टिकोण यह है कि विकास वंशानुक्रम और वातावरण दोनों की अंतःक्रिया (Interaction) का परिणाम है।

वंशानुक्रम एक इमारत की नींव (Foundation) है, जबकि वातावरण उस पर बनी हुई ईमारत (Structure) है। यदि नींव कमजोर है, तो वातावरण रूपी ईमारत मजबूत नहीं बन सकती। और यदि नींव मजबूत है लेकिन वातावरण रूपी सामग्री घटिया है, तब भी ईमारत अच्छी नहीं बनेगी। दोनों का उत्तम होना आवश्यक है।

7. शिक्षकों के लिए शैक्षिक निहितार्थ (Educational Implications for Teachers)

एक MPTET वर्ग 3 के भावी शिक्षक के लिए इस अध्याय को पढ़ने का मुख्य उद्देश्य कक्षा-कक्ष (Classroom) में इसका अनुप्रयोग (Application) करना है:

  1. व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Differences) की पहचान: शिक्षक को यह समझना होगा कि हर बच्चा अपने माता-पिता से अलग जीन्स लेकर आया है और अलग पारिवारिक माहौल से आता है। इसलिए कक्षा में सभी बच्चों से एक जैसी उपलब्धि की अपेक्षा नहीं की जा सकती। शिक्षक को विभेदित अनुदेशन (Differentiated Instruction) का प्रयोग करना चाहिए।
  2. उचित वातावरण का निर्माण: शिक्षक बच्चे के वंशानुक्रम (जीन्स) को तो नहीं बदल सकता, लेकिन वह विद्यालय में एक ऐसा समृद्ध और भय-मुक्त वातावरण (Enriched Environment) तैयार कर सकता है जिससे बच्चे की जन्मजात क्षमताओं का अधिकतम विकास हो सके।
  3. मार्गदर्शन और परामर्श (Guidance and Counseling): यदि कोई बच्चा पढ़ाई में पिछड़ रहा है या आक्रामक व्यवहार कर रहा है, तो शिक्षक उसके कारणों की खोज कर सकता है (क्या यह पारिवारिक कलह से है या कुपोषण से?) और तदनुसार उपचारात्मक (Remedial) कदम उठा सकता है।
  4. हीन भावना से बचाव: यदि कोई बच्चा वंशानुगत रूप से शारीरिक या मानसिक रूप से कमज़ोर है (जैसे दृष्टि दोष या कम IQ), तो शिक्षक का दायित्व है कि कक्षा का वातावरण ऐसा हो जहाँ उसे चिढ़ाया न जाए (No Bullying), बल्कि उसे समावेशी (Inclusive) माहौल मिले।
  5. समग्र विकास पर ध्यान: बच्चों के केवल किताबी ज्ञान (बुद्धि) पर जोर देने के बजाय, उनके सामाजिक और संवेगात्मक विकास के लिए स्कूल में खेल, कला, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए।

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  • प्रश्न: आनुवंशिकता (Heredity) की सबसे छोटी इकाई क्या है?
    • उत्तर: जीन (Gene)।
  • प्रश्न: मानव कोशिका में कितने गुणसूत्र (Chromosomes) होते हैं?
    • उत्तर: 46 (या 23 जोड़े)।
  • प्रश्न: बच्चे का लिंग निर्धारण किस गुणसूत्र पर निर्भर करता है?
    • उत्तर: पिता के Y गुणसूत्र पर (23वां जोड़ा – Sex Chromosome)।
  • प्रश्न: “बुद्धिमान माता-पिता की संतानों का मंदबुद्धि होना” वंशानुक्रम के किस नियम का उदाहरण है?
    • उत्तर: प्रत्यागमन का नियम (Law of Regression)।
  • प्रश्न: वुडवर्थ के अनुसार विकास किसका गुणनफल है?
    • उत्तर: वंशानुक्रम और वातावरण का (Heredity × Environment)।
  • प्रश्न: बाल विकास में ‘प्रकृति’ (Nature) से क्या तात्पर्य है?
    • उत्तर: जैविक विशिष्टताएं या वंशानुक्रम (Heredity)।
  • प्रश्न: जे.बी. वाटसन किस विचारधारा के घोर समर्थक थे?
    • उत्तर: वातावरण (Nurture / व्यवहारवाद) के।
  • प्रश्न: आनुवंशिकी का जनक (Father of Genetics) किसे माना जाता है?
    • उत्तर: ग्रेगर जॉन मेंडल (Mendel)।

❓ FAQ: परीक्षा उपयोगी बहुविकल्पीय प्रश्न (Example MCQs for MPTET)

नीचे दिए गए प्रश्न आपको MPTET परीक्षा के पैटर्न और कठिनाई स्तर को समझने में मदद करेंगे:

प्रश्न 1: ‘प्रकृति-पोषण विवाद’ (Nature-Nurture debate) में ‘प्रकृति’ से क्या अभिप्राय है?

(A) हमारे आस-पास का भौतिक पर्यावरण

(B) जैविक विशिष्टताएं या वंशानुक्रम संबंधी सूचनाएं

(C) एक बच्चे का जटिल सामाजिक ताना-बाना

(D) उचित आहार और स्वास्थ्य

उत्तर: (B)

व्याख्या: मनोविज्ञान में ‘प्रकृति’ (Nature) का अर्थ हमेशा बच्चे के जन्मजात गुणों, जीन्स और वंशानुक्रम से होता है। जबकि ‘पोषण’ (Nurture) का अर्थ वातावरण से होता है।

प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

(A) विकास केवल वंशानुक्रम का परिणाम है।

(B) विकास केवल वातावरण का परिणाम है।

(C) विकास वंशानुक्रम और वातावरण की अंतःक्रिया का परिणाम है।

(D) विकास पर न तो वंशानुक्रम का प्रभाव पड़ता है और न ही वातावरण का।

उत्तर: (C)

व्याख्या: वुडवर्थ और आधुनिक मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, विकास हमेशा इन दोनों कारकों का गुणात्मक (Multiplicative) परिणाम होता है। दोनों में से किसी एक को भी अलग नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 3: मानव व्यक्तित्व परिणाम है:

(A) केवल पालन-पोषण और शिक्षा का

(B) आनुवंशिकता और वातावरण की अंतःक्रिया का

(C) केवल वातावरण का

(D) केवल आनुवंशिकता का

उत्तर: (B)

व्याख्या: मानव व्यक्तित्व कभी भी किसी एक कारक से नहीं बनता। हमारी शारीरिक बनावट जीन्स से आती है, लेकिन हमारा व्यवहार, भाषा और नैतिकता समाज (वातावरण) से सीखी जाती है।

प्रश्न 4: एक 6 वर्षीय लड़की खेलकूद में असाधारण योग्यता का प्रदर्शन करती है। उसके माता-पिता दोनों ही उत्कृष्ट खिलाड़ी हैं और उसे नित्य प्रशिक्षण प्राप्त करने भेजते हैं। इस बच्ची की क्षमताएं संभवतः निम्नलिखित में से किसके बीच अंतःक्रिया का परिणाम हैं?

(A) स्वास्थ्य और प्रशिक्षण

(B) आनुवंशिकता और वातावरण

(C) अनुशासन और पोषण

(D) वृद्धि और विकास

उत्तर: (B)

व्याख्या: बच्ची को अच्छे जीन्स (आनुवंशिकता) अपने खिलाड़ी माता-पिता से मिले हैं, और उसे जो दैनिक प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) मिल रहा है, वह उसका ‘वातावरण’ है। यह दोनों का बेहतरीन उदाहरण है।

प्रश्न 5: बच्चे के विकास में आनुवंशिकता और वातावरण की भूमिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

(A) आनुवंशिकता और वातावरण दोनों एक बच्चे के विकास में 50-50% का योगदान देते हैं।

(B) समवयस्कों (Peers) और जीन्स का तुलनात्मक योगदान निश्चित नहीं होता है।

(C) आनुवंशिकता वातावरण को निर्धारित करती है।

(D) एक अच्छा वातावरण खराब आनुवंशिकता की पूरी तरह भरपाई कर सकता है।

उत्तर: (B)

व्याख्या: विकास में आनुवंशिकता और वातावरण का अनुपात 50-50% फिक्स नहीं होता है (यह योगात्मक नहीं है)। किसी क्षेत्र (जैसे आंखों का रंग) में आनुवंशिकता 90% हावी हो सकती है, जबकि दूसरे क्षेत्र (जैसे भाषा सीखना) में वातावरण 90% हावी हो सकता है। अतः इनका तुलनात्मक योगदान परिवर्तनशील (Dynamic) होता है।

प्रश्न 6: “एक बच्चा जन्म से ही बहुत मेधावी है, लेकिन उसे एक बंद कमरे में बिना किसी सामाजिक संपर्क के बड़ा किया जाता है, जिसके कारण वह भाषा नहीं सीख पाता।” यह स्थिति क्या सिद्ध करती है?

(A) भाषा विकास के लिए केवल वंशानुक्रम आवश्यक है।

(B) उत्तम जीन्स होने के बावजूद, उचित वातावरण के बिना विकास संभव नहीं है।

(C) विकास एक निरंतर प्रक्रिया नहीं है।

(D) प्रकृति, पोषण से अधिक शक्तिशाली है।

उत्तर: (B)

व्याख्या: यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि क्षमता (जीन्स) होने पर भी, उसे विकसित करने के लिए सामाजिक वातावरण और अवसर का होना अत्यंत आवश्यक है।

अंतिम संदेश:

प्रिय शिक्षक साथियों, वंशानुक्रम और वातावरण का यह अध्याय आपको यह दृष्टिकोण देता है कि कक्षा का हर बच्चा अपने आप में एक ‘यूनिक’ (अद्वितीय) रचना है। आपका काम उन बीजों (बच्चों की जन्मजात क्षमताओं) को पहचानना और उन्हें एक ऐसा उपजाऊ वातावरण (स्नेह, शिक्षा और प्रोत्साहन) प्रदान करना है, जहाँ वे अपनी पूरी क्षमता के साथ खिल सकें। परीक्षा की तैयारी पूरे आत्मविश्वास के साथ करें!

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